नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर जारी उथल-पुथल ने एक नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के युवा और प्रभावशाली चेहरा रहे राघव चड्ढा ने ‘आप’ का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का फैसला किया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पार्टी ने चड्ढा को सब कुछ दिया, लेकिन वे भाजपा की गोद में जा बैठे। इसके जवाब में राघव चड्ढा ने पलटवार करते हुए कहा है कि वे घायल हैं, इसलिए और भी अधिक घातक साबित होंगे। चड्ढा के इस फैसले से राज्यसभा में पार्टी की स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में पत्रकारों से बात करते हुए हजारे ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी सही रास्ते पर चल रही होती, तो राघव चड्ढा जैसे समर्पित नेताओं को पार्टी छोड़कर नहीं जाना पड़ता। उन्होंने परोक्ष रूप से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे जरूर कोई गंभीर वजह रही होगी। हजारे के अनुसार, यह स्थिति नेतृत्व की विफलता को दर्शाती है। साल 2012 में जिस भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की पृष्ठभूमि से इस पार्टी का उदय हुआ था, उसमें आए इस बड़े बिखराव को राजनीति के जानकारों ने पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना है।











