​महंगे स्मार्टफोन से उपभोक्ता परेशान: बजट फोन की बिक्री में ४५% की भारी गिरावट

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नई दिल्ली: त्योहारी सीजन में मिलने वाले डिस्काउंट और आकर्षक फाइनेंसिंग ऑफर्स के बावजूद भारत का स्मार्टफोन बाजार फिलहाल ग्राहकों का इंतजार कर रहा है। पिछले ६ वर्षों में पहली बार जून तिमाही (क्यू २) में स्मार्टफोन की बिक्री में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष २०२६ की दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट में वार्षिक आधार पर १० प्रतिशत की गिरावट आई है।
​इस गिरावट का मुख्य कारण स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों, विशेषकर मेमोरी चिप (डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी और फ्लैश मेमोरी) की कीमतों में हुई उल्लेखनीय वृद्धि है। इसी वजह से मोबाइल कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हुई हैं और इस तिमाही के अंत तक स्मार्टफोन की औसत कीमत करीब १५ प्रतिशत बढ़ चुकी है। बढ़ती महंगाई और उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता कम होने के कारण लोग नया स्मार्टफोन खरीदने में समय ले रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर १५ हजार रुपये से कम कीमत वाले बजट स्मार्टफोन पर पड़ा है, जिसकी बिक्री में ४५ प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, एंट्री और मिड-रेंज बाजार पर राज करने वाले चीनी ब्रांड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी २०२० के बाद से अपने न्यूनतम स्तर पर आ गई है। उत्पादन लागत को नियंत्रित करने के लिए कई कंपनियां अब दोबारा ४जी स्मार्टफोन बाजार में उतारने की रणनीति अपना रही हैं।
​सस्ते स्मार्टफोन खरीदारों की संख्या घटने के बावजूद, ४५ हजार रुपये से ऊपर वाले ‘अल्ट्रा-प्रीमियम’ सेगमेंट पर महंगाई का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। इसका मुख्य कारण आसान ईएमआई और फाइनेंसिंग योजनाएं हैं, जिन्होंने उपभोक्ताओं के लिए महंगे स्मार्टफोन खरीदना आसान बना दिया है।
​बाजार में ब्रांड्स के प्रदर्शन की बात करें तो बजट स्मार्टफोन की बिक्री घटने के बावजूद, अपनी वी७० सीरीज की अत्यधिक मांग के कारण वीवो, आईकू को पीछे छोड़कर १८ प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ भारत का नंबर वन स्मार्टफोन ब्रांड बना हुआ है। शीर्ष पांच ब्रांडों में सैमसंग एकमात्र ऐसी कंपनी रही, जिसने बाजार की मंदी के बीच भी २ प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। गैलेक्सी ए सीरीज, फ्लैगशिप एस सीरीज और आकर्षक प्रमोशनल ऑफर्स के दम पर कंपनी दूसरे स्थान पर रही। ओप्पो १४ प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि शाओमी (पोको सहित) १३ प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ चौथे और रियलमी पांचवें स्थान पर खिसक गया है। २० हजार रुपये से कम वाले सेगमेंट में बार-बार कीमतें बढ़ने से शाओमी और रियलमी दोनों की बिक्री प्रभावित हुई है। उधर आईफोन १७ सीरीज की मांग बाजार में बनी रहने के बावजूद, आपूर्ति में कमी और इन्वेंट्री की कमी के कारण एप्पल के शिपमेंट में ३ प्रतिशत की गिरावट आई है। शीर्ष पांच से बाहर रहने वाला ‘नथिंग’ भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्मार्टफोन ब्रांड बन गया है, जबकि अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट में ‘गूगल पिक्सेल’ ने ६८ प्रतिशत की सबसे ऊंची वृद्धि दर्ज की है।
​काउंटरप्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य भी बहुत उत्साहजनक नजर नहीं आ रहा है। मेमोरी चिप की कीमतें अभी और बढ़ने की संभावना है, जिसके चलते वर्ष २०२६ में भारत के स्मार्टफोन बाजार में कुल १३ प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, जिससे इस वर्ष नया स्मार्टफोन खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने होंगे।

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