नई दिल्ली: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की चार दिवसीय यात्रा पूरी कर स्वदेश लौट आए हैं। किर्गिस्तान में उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जबकि उज्बेकिस्तान की यात्रा द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित रही।
यात्रा के दौरान उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दाराजाली दोस्तलिक’ प्रदान किया। भारत में इस सम्मान को लेकर ‘बाबर’ के इतिहास से जोड़कर राजनीतिक बहस हो रही है, लेकिन उज्बेकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी ऐतिहासिक विवाद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच वर्तमान मित्रता और विश्वास का सम्मान करना है।
भारत में उज्बेकिस्तान के राजदूत सरदोर मिर्जायुसुपोविच रुस्तम्बेव के अनुसार, किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को यह सम्मान प्रदान करना बेहद दुर्लभ है। ‘दोस्तलिक’ का अर्थ मित्रता है और यह दर्शाता है कि दोनों देशों के संबंध उच्चतम स्तर तक पहुंच चुके हैं।
राजदूत ने कहा कि यह सम्मान आपसी मित्रता, विश्वास और भाईचारे का मजबूत प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारत–उज्बेकिस्तान संबंधों के भविष्य के लिए एक मजबूत और प्रभावशाली आधार तैयार हुआ है।





