अनुच्छेद ३७० के ७ साल पूरे होने पर पाक सेना का दोहरा चेहरा बेनकाब
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद ३७० हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत पर जमकर निशाना साधा है। पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना ५ अगस्त के दिन को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ के रूप में मनाती है। इस मौके का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने कश्मीरी लोगों के समर्थन का दावा किया है। हालांकि, यह बयान ऐसे समय में आया है जब खुद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जनता पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ सड़कों पर उतरी हुई है।
तीनों सेना प्रमुखों की गीदड़भभकी
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग (आईएसपिआर) द्वारा जारी साझा बयान में सेना प्रमुख असीम मुनीर, नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने कहा:
दक्षिण एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब कश्मीर विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की इच्छाओं के अनुसार हो।
भारत सरकार द्वारा ५ अगस्त २०१९ को अनुच्छेद ३७० रद्द करने के बाद से कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और वहां की आबादी का ढांचा बदलने की कोशिश की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत पर इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए दबाव बनाना चाहिए।
पीओके में जल रहे विद्रोह के शोले
एक तरफ जहां पाकिस्तानी सेना जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति प्रेम का दिखावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पीओके में उसका क्रूर चेहरा सामने आ रहा है।
नागरिकों पर गोलीबारी: पीओके में बुनियादी सुविधाओं और आजादी की मांग कर रहे आम नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना गोलियां बरसा रही है।
मस्जिदों पर हमला और हत्या: हाल ही में पाकिस्तानी सेना द्वारा मस्जिदों को निशाना बनाने और एक इमाम की हत्या के बाद पूरे पीओके में जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया है।
सच्चाई छिपाने की कोशिश: पीओके में सेना के अत्याचार दुनिया के सामने न आएं, इसके लिए पाकिस्तान ने विदेशी मीडिया की आवाजाही और रिपोर्टिंग पर नए कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान के बाद अब सिंध और पीओके में भी असीम मुनीर और शहबाज सरकार के खिलाफ गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन रही है, जिससे ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान फिर से ‘कश्मीर राग’ अलाप रहा है।










