बुजुर्ग का ब्रेन कैंसर गायब, थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को मिला नया जीवन
कोलकाता: नारायण हेल्थ के वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों ने दो बेहद जटिल मामलों में चमत्कारिक सफलता हासिल करते हुए एक ७ वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे और ६२ वर्षीय ब्रेन कैंसर से जूझ रहे बुजुर्ग की जान बचा ली है। डॉक्टरों ने उन्नत ‘हैप्लो कॉर्ड ट्रांसप्लांट’ और ‘कार टी-सेल थेरेपी’ का उपयोग कर इन दोनों असाध्य बीमारियों पर विजय पाई है।
बच्चे को बार-बार खून चढ़ाने से मिली मुक्ति
’एचबीई बीटा थैलेसीमिया’ से पीड़ित ७ साल के मासूम को हर महीने खून चढ़ाना पड़ता था। परिजनों को ‘सेव द सिबलिंग’ कार्यक्रम के तहत पंजीकरण कराने की सलाह दी गई। आईवीएफ और जेनेटिक टेस्टिंग के माध्यम से एक ऐसे स्वस्थ बच्चे का जन्म कराया गया जिसका एचएलए पीड़ित बच्चे से मेल खाता था।
इसके बाद नवजात के गर्भनाल के रक्त (कर्ड ब्लड) और पिता के स्टेम सेल्स की मदद से ‘हैप्लो कॉर्ड ट्रांसप्लांट’ किया गया। इलाज के दौरान संक्रमण और अन्य कई गंभीर जटिलताएं आईं, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने उन पर काबू पा लिया। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे खून चढ़ाने की जरूरत समाप्त हो चुकी है।
कार टी-सेल थेरापी से कैंसर पूरी तरह खत्म
दूसरी ओर, ६२ वर्षीय बुजुर्ग मरीज को चलने-फिरने में आ रही परेशानी के बाद ‘प्राइमरी सीएनएस लिम्फोमा’ (एक प्रकार का ब्रेन कैंसर) होने का पता चला था। ४ बार हैवी कीमोथेरेपी देने के बावजूद बीमारी पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद डॉक्टरों ने ‘कार टी-सेल थेरेपी’ का रास्ता चुना।
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए सीडी१९ और सीडी२२ को निशाना बनाने वाली थेरेपी दी गई। इसके बाद जब दोबारा एमआरआई कराया गया, तो ट्यूमर का नामोनिशान भी नहीं मिला। मरीज अब पूरी तरह ठीक और सामान्य जीवन जी रहे हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक, नारायण हेल्थ की यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर है, जिससे असाध्य रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण जागी है।









