नाबार्ड पश्चिम बंगाल ने मनाया ४५वां स्थापना दिवस

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समावेशी और सतत ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

कोलकाता: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के पश्चिम बंगाल क्षेत्रीय कार्यालय ने अपना ४५वां स्थापना दिवस अत्यंत उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर नाबार्ड ने समावेशी, सतत एवं प्रौद्योगिकी-आधारित ग्रामीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। इस गरिमामयी समारोह में भारतीय रिज़र्व बैंक, राज्य सरकार, विभिन्न बैंकों, सहकारी संस्थाओं एवं विकास सहयोगी संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
​कार्यक्रम में भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक श्री सुधांशु प्रसाद मुख्य अतिथि तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी), पश्चिम बंगाल के संयोजक श्री बलबीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत नाबार्ड पश्चिम बंगाल क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक द्वारा किया गया।
​कृषि एवं ग्रामीण विकास में नाबार्ड की भूमिका
अपने संबोधन में मुख्य महाप्रबंधक श्री पी.के. भारद्वाज ने कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नाबार्ड के चार दशकों से अधिक के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुनर्वित्त (रिफाइनेंस), ग्रामीण अवसंरचना विकास, संस्थागत सुदृढ़ीकरण तथा क्रेडिट प्लस पहलों में नाबार्ड की भूमिका को रेखांकित किया। अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष २०२६ के संदर्भ में उन्होंने महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की परिवर्तनकारी भूमिका का विशेष उल्लेख किया।
​उन्होंने बताया कि नाबार्ड ने ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ), ४,६०० प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के कम्प्यूटरीकरण, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देने तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के सुदृढीकरण जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि क्षेत्र में कुल सकल ऋण प्रवाह (जीएलसी) उपलब्धि ₹१.१७ लाख करोड़ रही। साथ ही, संभाव्यता आधारित ऋण योजना (पीएलपी) २०२६-२७ के अनुसार पश्चिम बंगाल की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹३.९९ लाख करोड़ आंकी गई है, जिसमें से ₹१.३७ लाख करोड़ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए निर्धारित है।
​डिजिटल तकनीक और जलवायु-संवेदी कृषि का आह्वान
विशिष्ट अतिथि श्री बलबीर सिंह ने भारतीय कृषि की मजबूती एवं लचीलेपन पर बल देते हुए कृषि से संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने और कृषि निर्यात की संभावनाओं का उल्लेख किया। मुख्य अतिथि श्री सुधांशु प्रसाद ने अपने मुख्य भाषण में नाबार्ड को ४५ वर्ष की सफल सेवा के लिए बधाई देते हुए उसे देश की अग्रणी विकास वित्तीय संस्था के रूप में विकसित होने पर सराहा। उन्होंने विकसित भारत २०४७ के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए डिजिटल तकनीकों को अपनाने, मूल्य संवर्धन तथा जलवायु-संवेदी कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
​कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड ने अपनी वार्षिक उपलब्धि पुस्तिका २०२५-२६ तथा सफलता गाथा संकलन का विमोचन किया। साथ ही, वाटरशेड विकास, आरआईडीएफ एवं एफपीओ पर आधारित वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया गया। नाबार्ड की विभिन्न पहलों से जुड़ी महिला किसानों को सम्मानित किया गया, वहीं पश्चिम मेदिनीपुर, मालदा एवं नदिया जिलों के विकास प्रबंधकों ने अपने जिलों में संचालित अभिनव पहलों का प्रस्तुतीकरण किया।
कार्यक्रम स्थल पर महिला कारीगरों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की छह प्रदर्शन स्टॉल भी लगाई गईं, जिन्होंने महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रति नाबार्ड की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

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