भारत-यूके सीईटीए के तहत कोलकाता से ज्वेलरी एक्सपोर्ट की पहली खेप यूके रवाना

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काेलकाता: भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत आज कोलकाता एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए ज्वेलरी के पहले एक्सपोर्ट कंसाइनमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। आभूषण निर्माण और बेहतरीन कारीगरी के प्रमुख केंद्र कोलकाता के लिए इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
​कोलकाता में आयोजित यह कार्यक्रम एक देशव्यापी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली, मुम्बई, सूरत, जयपुर और चेन्नई से कुल १० मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऐतिहासिक ज्वेलरी शिपमेंट भेजी जा रही है। कोलकाता के ६ प्रमुख एक्सपोर्टर्स—जैस ज्वैलरी प्राइवेट लिमिटेड, मॉडर्न इम्पेक्स, एल. गोपाल एंड संस (ज्वैलर्स), एबी ज्वेल्स प्राइवेट लिमिटेड, जेएस ज्वेल्स प्राइवेट लिमिटेड और हसमुख पारेख ज्वैलर्स इस शुरुआती खेप का हिस्सा हैं, जिसमें सोने, हीरे, चांदी और प्लेटिनम के आभूषण शामिल हैं।
​इस गौरवपूर्ण अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के उद्योग और वाणिज्य मंत्री श्री तापस रॉय, कस्टम्स के सदस्य श्री योगेंद्र गर्ग (आईआरएस), विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के अतिरिक्त महानिदेशक श्री चंद्रकांत मिश्रा (आईटीएस) और पूर्वी भारत में ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर डॉ. एंड्रयू फ्लेमिंग सहित जीजेईपीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री पंकज पारेख की गरिमामयी उपस्थिति रही।
​भारतीय आभूषण उद्योग के लिए नए युग की शुरुआत
यह समझौता लागू होने के पहले दिन से ही यूके के बाजार में भारतीय आभूषणों को जीरो-ड्यूटी एक्सेस (शून्य आयात शुल्क) प्रदान करता है, जिससे यूके का ४ प्रतिशत तक का इंपोर्ट टैरिफ खत्म हो गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूके के ४ बिलियन अमेरिकी डॉलर के विशाल आभूषण आयात बाजार में बहुत बड़ा कॉम्पिटिटिव फायदा मिलेगा।
​जीजेईपीसी के चेयरमैन श्री किरीट भंसाली और ईस्टर्न रीजन के रीजनल चेयरमैन श्री पंकज पारेख ने संयुक्त रूप से कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते की बदौलत अगले ३ वर्षों में यूके को होने वाला भारत का रत्न और आभूषण निर्यात लगभग ७५४ मिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग २.५ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह विकास न केवल एक्सपोर्टर्स और मैन्युफैक्चरर्स बल्कि देश के लाखों एमएसएमई, डिजाइनर्स और पारंपरिक कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

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