भद्रपुर: नेपाल में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई ऐतिहासिक वृद्धि ने सीमावर्ती क्षेत्रों में एक नया संकट पैदा कर दिया है। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा हाल ही में की गई कीमतों में बढ़ोतरी के बाद काठमांडू सहित प्रमुख शहरों में पेट्रोल २१९ रुपये और डीजल २०७ रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। नेपाल में ईंधन के दाम दक्षिण एशिया में सबसे महंगे होने के कारण भारत और नेपाल के बीच कीमतों में बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जिससे सीमा पर तस्करी और कालाबाजारी का खतरा बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार प्रशासन ने सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगा दी है।बिहार के अररिया, किशनगंज और पूर्णिया जैसे जिलों में यह प्रतिबंध सख्ती से लागू किया गया है। भारत में ईंधन सस्ता होने के कारण नेपाली वाहनों द्वारा सीमा पार जाकर तेल भरवाने की होड़ मच गई थी, जिसे रोकने के लिए भारतीय प्रशासन ने ‘फ्यूल लॉकडाउन’ जैसा कदम उठाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गैलन या बोतलों में तेल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और केवल आपातकालीन स्थिति में ही सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। नेपाल में पिछले एक महीने के भीतर चार बार कीमतों में इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ा है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की स्थिति को नेपाल में इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस महंगाई के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और विपक्षी दलों द्वारा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए गए हैं। सीमा पर तस्करी रोकने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बलों ने गश्त तेज कर दी है। दूसरी ओर, भारतीय पंपों पर नेपाली वाहनों पर पाबंदी लगने के बाद नेपाल के सीमावर्ती पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण होने की संभावना है।










