बंगाल रणसंग्राम: दूसरे चरण का प्रचार कल थमेगा, भवानीपुर में ममता और शुभेंदु की कड़ी टक्कर​

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काेलकाता: ​पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के दूसरे चरण के लिए सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। २९ अप्रैल को होने वाले १४२ सीटों के मतदान के लिए कल (सोमवार) शाम से चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। चुनाव आयोग द्वारा ‘साइलेंस पीरियड’ लागू करने की तैयारी के बीच सभी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।​भवानीपुर: सबसे बड़ी प्रतिष्ठा की जंग इस चरण का मुख्य आकर्षण कोलकाता की भवानीपुर सीट है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है। दोनों ही दिग्गजों ने इस चुनाव को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। जहां ममता बनर्जी पदयात्राओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हैं, वहीं शुभेंदु अधिकारी ‘परिवर्तन’ के दावे के साथ उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं।​शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों का समीकरण दूसरे चरण में कोलकाता की शहरी सीटों जैसे इंटाली, मानिकतला और काशीपुर-बेलगछिया में मतदाताओं का मिजाज परखा जाएगा। साथ ही बैरकपुर, खड़दह और दमदम जैसे औद्योगिक बेल्ट में भी मतदान होना है, जहां श्रमिकों और मध्यम वर्ग की भूमिका निर्णायक होगी। सोनारपुर और डायमंड हार्बर जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण-शहरी समीकरणों को साधने के लिए दल अंतिम समय तक पसीना बहा रहे हैं।​दिग्गजों की साख दांव पर भाजपा की ओर से प्रियंका टिबड़ेवाल और रूपा गांगुली मैदान में हैं, जबकि तृणमूल की कमान खुद ममता बनर्जी और फिरहाद हकीम जैसे भारी-भरकम नेताओं के हाथों में है। वामपंथी दलों का नेतृत्व मोहम्मद सलीम कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी की उपस्थिति मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है।​सुरक्षा के कड़े इंतजाम चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है। ४६६० अतिरिक्त मतदान केंद्रों की मंजूरी के साथ ही संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई है। आयोग का स्पष्ट कहना है कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं।​कल शाम प्रचार रुकने के बाद अब सबकी निगाहें २९ अप्रैल के जनादेश पर टिकी हैं, जो बंगाल की राजनीति की अगली दिशा तय करेगा।

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