​ड्रॉ में ‘बाई’ मिलने से लवलीना ने पदक किया पक्का, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला पदक तय

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ग्लासगो: राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) २०२६ के उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत ने अपना पहला पदक सुरक्षित कर लिया है।
​टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को ड्रॉ में ‘बाई’ मिली, जिसके चलते उन्होंने बिना किसी चुनौती के सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश कर पदक पक्का कर लिया। ७५ किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर उन्होंने पूरी टीम का उत्साह बढ़ाया है।
​इस भार वर्ग के ड्रॉ में केवल ५ मुक्केबाज ही शामिल थीं। इसी वजह से लवलीना समेत ३ मुक्केबाज सीधे अंतिम ४ (सेमीफाइनल) में पहुंच गईं, जबकि बाकी २ मुक्केबाजों को एकमात्र क्वार्टर फाइनल मैच खेलना होगा।
​राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी के नियमों के तहत सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक दिया जाता है। इस प्रकार ग्लासगो में अपना पहला मैच खेलने से पहले ही लवलीना ने कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया है।
​लवलीना अब ३१ जुलाई को होने वाले सेमीफाइनल में ताफाकी के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेंगी। उस मैच में जीत हासिल करने पर उनके पास स्वर्ण पदक के लिए दावेदारी पेश करने का मौका होगा। सेमीफाइनल जीतने पर लवलीना का कम से कम रजत पदक पक्का हो जाएगा, अन्यथा वे कांस्य पदक के साथ लौटेंगी।
​राष्ट्रमंडल खेलों में यह उनका पहला ‘पोडियम फिनिश’ होगा। इससे पहले लवलीना २०१८ गोल्ड कोस्ट के क्वार्टर फाइनल में सेंडी रयान से हार गई थीं, जबकि २०२२ बर्मिंघम में वे पहले ही मैच में बाहर हो गई थीं। उन दोनों मौकों पर उन्होंने ६९ किग्रा वर्ग में भाग लिया था।

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