ईरान ने दावों को नकारा
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद ईरान ने जेल में बंद आठ महिला प्रदर्शनकारियों की फांसी की सजा को टाल दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए ईरानी नेतृत्व के इस कदम की सराहना की है।
ट्रंप ने बुधवार को अपनी पोस्ट में लिखा, “ईरान से बहुत अच्छी खबर मिली है। मुझे बताया गया है कि जिन आठ महिला प्रदर्शनकारियों को आज रात फांसी दी जानी थी, अब उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा। मैं ईरानी नेताओं का आभारी हूं कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर मेरे अनुरोध का सम्मान किया।” ट्रंप के अनुसार, इनमें से चार महिलाओं को तत्काल रिहा किया जाएगा और चार को एक महीने की जेल की सजा दी जाएगी। जिन महिलाओं की जान बचाने का दावा किया गया है उनमें बेता हेम्मती, गजल गलंदरी और गोलनाज नराघी जैसे नाम शामिल हैं।
दूसरी ओर, ईरान सरकार ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे ‘झूठ का पुलिंदा’ बताते हुए कहा कि ट्रंप अपनी छवि सुधारने के लिए काल्पनिक उपलब्धियां गढ़ रहे हैं। ईरान की सरकारी मीडिया का कहना है कि इन महिलाओं को फांसी की सजा सुनाए जाने की बात ही गलत है और अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के सामने गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। हालांकि, कई मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि बेता हेम्मती जैसी प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप हैं और उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।









