गुजरात पोर्ट से दिल्ली तक एनसीबी का बड़ा एक्शन
नई दिल्ली: भारत की शीर्ष लागुऔषध रोधी एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए देश के इतिहास में पहली बार ‘कैप्टागन’ नामक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग की एक विशाल खेप जब्त की है। ‘ऑपरेशन रेजपिल’ तहत की गई इस ऐतिहासिक कार्रवाई में कुल २२७.७ किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट और पाउडर बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में अनुमानित कीमत १८२ करोड़ रुपये है। इस मामले में भारत में अवैध रूप से रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया है।
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से दिल्ली तक फैला जाल
एनसीबी के अनुसार, यह खुफिया इनपुट आधारित एक व्यापक बहु-एजेंसी ऑपरेशन था। शुरुआती जांच के बाद सुरक्षा बलों ने दिल्ली के नेब सराय इलाके में छापा मारकर एक घर से संदिग्ध को दबोचा। आरोपी सीरियाई नागरिक नवंबर २०२४ में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था, लेकिन वीजा खत्म होने के बाद भी वह अवैध रूप से दिल्ली में रहकर इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था।
उसकी कड़ाई से पूछताछ के बाद, १४ मई २०२६ को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर एक कंटेनर की तलाशी ली गई। इस कंटेनर में ‘भेड़ की ऊन’ होने की घोषणा की गई थी, लेकिन जब इसकी बारीकी से जांच की गई, तो ऊन के बोरों के बीच छिपाकर रखा गया १९६.२ किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद हुआ। यह पूरी खेप भारत के रास्ते खाड़ी देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब और उसके आसपास के मिडिल ईस्ट के देशों में तस्करी के लिए भेजी जा रही थी।
अमित शाह ने कहा, ‘भारत को नहीं बनने देंगे ‘ट्रांजिट रूट’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बड़ी कामयाबी की घोषणा करते हुए एनसीबी के जवानों को बधाई दी। उन्होंने लिखा, “मोदी सरकार ‘ड्रग-मुक्त भारत’ के लिए संकल्पित है। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के माध्यम से हमारी एजेंसियों ने देश में पहली बार ‘जिहादी ड्रग’ कही जाने वाली कैप्टागन की १८२ करोड़ रुपये की खेप पकड़ी है। मध्य पूर्व जा रही इस खेप को रोकना और विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है। मैं दोहराता हूं कि भारत में प्रवेश करने वाले या हमारी जमीन का पारगमन मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने वाले ड्रग्स के हर एक ग्राम पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
क्या है कैप्टागन और इसे क्यों कहते हैं ‘जिहादी ड्रग’?
‘कैप्टागन’ मूल रूप से फेनेथिलिन और एम्फेटामिन आधारित एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट (उत्तेजक दवा) है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “गरीबों का कोकीन” भी कहा जाता है क्योंकि यह बेहद कम लागत में तैयार हो जाती है, लेकिन इसका बाजार मूल्य बहुत अधिक है।
मिडिल ईस्ट के युद्धग्रस्त इलाकों, खासकर सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) और अन्य चरमपंथी संगठनों के लड़ाके युद्ध के दौरान इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। इस ड्रग को लेने के बाद इंसान के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर ऐसा असर होता है कि उसे कई दिनों तक नींद, थकान, भूख, दर्द या डर का एहसास नहीं होता। यह लड़ाकों में अत्यधिक आक्रामकता, हिंसक व्यवहार और बिना डरे लंबे समय तक गोलीबारी करने की कृत्रिम ऊर्जा भर देती है। यही वजह है कि इसे ‘जिहादी ड्रग’ नाम दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस ड्रग के अवैध व्यापार से होने वाली बेहिसाब कमाई का उपयोग सीधे तौर पर आतंकी फंडिंग और हथियारों की खरीद के लिए किया जाता है।










