पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनता एकजुट
सिलिगुड़ी: सिलीगुड़ी में हाल ही में आयोजित “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ” विशाल जनसभा और सार्वजनिक रैली में राज्य और केंद्र के कई दिग्गज नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति देखने को मिली। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी, भारत सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डा. शंकर घोष, उत्तर बंगाल विकास मंत्री निसिथ प्रमाणिक और दार्जिलिंग के सांसद राजु बिष्ट सहित अन्य प्रमुख नेता विशेष रूप से उपस्थित रहे।
रैली को संबोधित करते हुए नेताओं ने राज्य की पूर्ववर्ती और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल ने सीपीआईएम और टीएमसी के कुशासन के तहत लगभग पांच दशकों तक आर्थिक तंगी और उपेक्षा का सामना किया है। इस दौरान लोकतंत्र को कमजोर किया गया, सार्वजनिक संसाधनों की लूट की गई और आम जनता को उत्पीड़न, तोलाबाजी तथा कट-मनी संस्कृति के जाल में फंसाया गया।
इसके विपरीत, केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश परिवर्तनकारी विकास देख रहा है, और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल भी अब प्रगति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पारदर्शिता और सटीकता पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हर योग्य भारतीय नागरिक के मतदान अधिकारों की रक्षा करना और अवैध अप्रवासियों को हमारे देश में मतदान करने से रोकना चुनाव आयोग का मौलिक कर्तव्य है, जिसे आयोग पूरी निष्ठा से निभा रहा है।
जो लोग सत्ता में अपने दिनों के दौरान “वोट चोरी – चुनावी हेरफेर” में लिप्त रहे हैं, वे अच्छी तरह जानते हैं कि एक स्वच्छ मतदाता सूची के साथ वे कभी चुनाव नहीं जीत पाएंगे। यही कारण है कि वे हमारे देश में लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए लगातार छटपटाहट दिखा रहे हैं।
आयोजित यह रैली उन ताकतों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि उनके झूठ, फर्जी नैरेटिव और दुष्प्रचार का दौर अब समाप्त हो चुका है। भारत की जनता इन चालों को भली-भांति समझ चुकी है और भविष्य में भी हमारे लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं तथा जनमत की पवित्रता की रक्षा करती रहेगी।





