गंगटोक: मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग गोले ने कहा कि सिक्किम को कागजरहित न्याय व्यवस्था के रूप में घोषित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गर्व का विषय है और यह तेज, पारदर्शी तथा प्रौद्योगिकी आधारित न्याय व्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि नवाचार और सुशासन के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।आज गंगटोक स्थित चिंतन भवन में आयोजित प्रौद्योगिकी एवं न्यायिक शिक्षा विषयक सम्मेलन में उपस्थित होकर मुख्यमंत्री ने स्वयं को सम्मानित महसूस किया। इस अवसर पर सूर्य कांत, रोनी जेम्स गोविंदेन, जितेंद्र कुमार महेश्वरी, मोहम्मद धिलिप नवाज अब्दुल हमीद सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीश, न्यायाधीश तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विशिष्ट अतिथियों का आगमन न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है और इससे सिक्किम को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान प्राप्त हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सिक्किम के राज्यत्व के ५० वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर अत्यंत विशेष है, जिसे हाल ही में नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मनाया गया।तेजी से बदलती दुनिया के साथ कदम मिलाते हुए न्याय व्यवस्था में प्रौद्योगिकी के समावेशन को आवश्यक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-फाइलिंग और डिजिटल प्रकरण प्रबंधन जैसे उपाय न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सुलभ और समावेशी बनाएंगे।उन्होंने कहा कि विकसित भारत २०४७ के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर देश के लिए एक सशक्त और प्रौद्योगिकी संचालित न्याय व्यवस्था न्याय, विश्वास और सतत विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श न केवल भारत के लिए, बल्कि समूचे राष्ट्रमंडल क्षेत्र के लिए एक आधुनिक न्याय व्यवस्था के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।अंत में उन्होंने सभी विशिष्ट अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और सम्मेलन की पूर्ण सफलता की कामना की।










