सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस में खलबली: देउवा खेमा रणनीति बनाने में जुटा

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काठमांडू(नेत्र बिक्रम बिमली): नेपाली कांग्रेस की आधिकारिकता को लेकर जारी महीनों पुराने विवाद पर शुक्रवार को पूर्ण विराम लग गया। सर्वोच्च अदालत ने गगन थापा के नेतृत्व वाली कार्यसमिति को कानूनी मान्यता प्रदान कर दी है, जिससे शेरबहादुर देउवा पक्ष को बड़ा झटका लगा है।

अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए देउवा निकटवर्ती नेता एनपी साउद ने कहा कि यह फैसला उनकी उम्मीदों के विपरीत है। उन्होंने संकेत दिया कि अब उनके पास ‘पार्टी एकीकरण’ या ‘अन्य विकल्पों’ पर विचार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। वहीं, विमलेन्द्र निधि ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे विशेष महाधिवेशन की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करते और साथियों से चर्चा के बाद ही अगला कदम उठाएंगे।
न्यायाधीश सारंगा सुवेदी और नृपध्वज निरौला की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि जब संस्थापन पक्ष ने विशेष महाधिवेशन की मांग की अनदेखी की, तब विधानसम्मत तरीके से किया गया महाधिवेशन और उससे चुनी गई गगन थापा की टीम वैध है। अदालत ने यह भी माना कि निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई मान्यता और थापा के हस्ताक्षर से हुए चुनावों के बाद अब इस व्यवस्था में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता देवराज चालिसे ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पार्टी अब “अत्यधिक लचीलेपन” के साथ सबको साथ लेकर चलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो नेता पद्धति और विधान को चुनौती देंगे, उन्हें पार्टी जिम्मेदारी नहीं दे पाएगी। उन्होंने सभी नेताओं से आग्रह किया कि वे मतभेदों को भुलाकर पार्टी निर्माण में जुटें।

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