रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाते हुए भीषण हमला किया है। खाड़ी तट पर स्थित अल जुबैल में सऊदी अरामको के बेरी गैस प्लांट और लाल सागर तट पर स्थित जाज़ान रिफाइनरी पर हुए हमलों के बाद भीषण आग लग गई है।
अल जुबैल दुनिया के प्रमुख पेट्रोकेमिकल हब्स में से एक है, जो सऊदी अरब की जीडीपी में ७ प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। नासा की एफआईआरएमएस (फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) सैटेलाइट तस्वीरों में बेरी गैस प्लांट में बड़े पैमाने पर आग लगने की पुष्टि हुई है।
यह हमला सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच जेद्दा में सामूहिक रक्षा के लिए ‘मक्का समझौते’ पर हस्ताक्षर होने के ठीक दो दिन बाद हुआ है। ‘इस्लामिक नाटो’ के रूप में देखे जा रहे इस सुरक्षा समझौते के तुरंत बाद हुए इस हमले को नए गठबंधन की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हमलों से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा आना अभी बाकी है।











