‘१९४५ की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी’, भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की उठाई आवाज
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की कार्यवाहक प्रमुख (चार्ज डी अफेयर्स) योजना पटेल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससि) में तत्काल सुधारों की पुरजोर मांग की है। सुरक्षा परिषद के कामकाज के तरीकों पर आयोजित वार्षिक खुली बहस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि १९४५ में बनी इस संस्था का ढांचा ८० साल बाद आज की दुनिया की चुनौतियों से निपटने में असमर्थ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया भर में जारी वैश्विक संघर्षों को प्रभावी ढंग से रोकने में विफलता के कारण ही सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
भारतीय प्रतिनिधि योजना पटेल ने सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार के भारत के रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) को सुरक्षा परिषद में अधिक और उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, जिसके लिए लक्ष्य और समय-सीमा निर्धारित करके वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने दो साल के लिए चुने जाने वाले अस्थायी सदस्यों की ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुंच और कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। भारतीय राजदूत ने सचेत किया कि सुरक्षा परिषद को संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने का मंच नहीं बनने देना चाहिए और सदस्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व तथा वीटो जैसे मुख्य मुद्दों पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए।









