विश्व चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के साथ पिता का सपना पूरा किया मनीषा ने

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​अस्ताना (कजाकिस्तान): भारतीय महिला पहलवान मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। यह जीत उनके लिए केवल एक खेल उपलब्धि न होकर अपने दिवंगत पिता का सपना पूरा करने की भावुक कहानी भी है। स्वर्ण पदक जीतने के बाद मनीषा ने दर्शकों के समक्ष एक सफेद टी-शर्ट दिखाई, जिस पर उनके माता-पिता की तस्वीर थी। यह उनके पिता सुरेश को समर्पित भावुक श्रद्धांजलि थी, जो अपनी बेटी को विश्व चैंपियन बनते देखना चाहते थे। महिलाओं के ५९ किग्रा भार वर्ग के फाइनल में २९ वर्षीय मनीषा ने अमेरिका की अबीगेल एलिजाबेथ को ८-६ से पराजित कर स्वर्ण पदक जीता। मनीषा के लिए यह जीत खास रही क्योंकि एक समय वह ०-६ से पीछे थीं, लेकिन बाद में असाधारण पुनरागमन करते हुए उन्होंने ८-६ से ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं। इससे पहले भारत के लिए पुरुष पहलवान सुशील कुमार ने २०१० में विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण पदक जीता था। हरियाणा के जींद से करियर की शुरुआत करने वाली मनीषा की यात्रा आसान नहीं थी। वर्ष २०२२ में उनके पिता सुरेश का उसी दिन निधन हो गया था, जिस दिन उन्हें एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया प्रस्थान करना था। पिता के करीब होने के कारण मनीषा इस आघात को सहन नहीं कर सकीं और एक समय कुश्ती छोड़ने की सोच चुकी थीं। वह घर छोड़कर प्रतियोगिताओं में जाने के लिए तैयार नहीं थीं। मनीषा के भाई रिंकू के अनुसार, परिवार ने मनीषा को समझाया था कि पिता ने उन्हें पहलवान बनाने के लिए जो मेहनत और त्याग किया है, उसे इस तरह अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। परिवार ने मनीषा को किसी तरह मंगोलिया जाने के लिए राजी किया था। मनीषा ने मंगोलिया में हुई एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। वहीं से वह खेल में लौटी थीं। मनीषा एक किसान परिवार से आती हैं, जहाँ खेल का माहौल पहले से ही था। भाई रिंकू कबड्डी खिलाड़ी हैं जबकि भाभी ममता सिहाग भी पहलवान हैं। रिंकू के अनुसार, मनीषा बचपन से ही उन्हें गाँव में कबड्डी खेलते हुए देखती थीं। वहीं से उनमें खेल के प्रति रुचि आई। परिवार ने बाद में मनीषा को टीम गेम के बदले व्यक्तिगत खेल में आगे बढ़ाने का फैसला किया। शारीरिक मजबूती और मानसिक दृढ़ता को देखते हुए परिवार ने उन्हें कुश्ती खेल में शामिल किया था। मनीषा ने अपने कुश्ती करियर में कई चुनौतियों का सामना किया। उन्होंने ६२ किग्रा, ६५ किग्रा और ५७ किग्रा भार वर्ग में भी खेला, लेकिन करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि ५९ किग्रा भार वर्ग में आई। यह गैर-ओलंपिक भार वर्ग है। एशियाई चैंपियनशिप में और ३ पदक जीतने के बाद (जिसमें पिछले वर्ष का स्वर्ण भी शामिल है) मनीषा ने इस बार विश्व चैंपियन बनकर अपने करियर को अलग ऊँचाई दी है।

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