न्यूयॉर्क: विश्व कप के रोमांच के बीच अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ (एएफए) एक बार फिर बहुत बड़े संकट में घिर गया है। इजिप्ट के खिलाफ अर्जेंटीना की विवादित जीत को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, और अब अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई द्वारा महासंघ की वित्तीय गतिविधियों की जांच शुरू करने से खेल जगत में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अर्जेंटीना के प्रमुख अखबार ‘ला नेसियोन’ की रिपोर्ट के अनुसार, एफबीआई इस बात की गहन तफ्तीश कर रही है कि महासंघ ने अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली का उपयोग करके भारी मात्रा में धन का लेन-देन क्यों किया और क्या इस प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग या कोई अन्य गंभीर वित्तीय अपराध किया गया है। महासंघ के अध्यक्ष क्लाउडियो टैपिया के कार्यकाल में हुए तमाम बड़े ट्रांजैक्शन अब अमेरिकी जांच एजेंसी के रडार पर हैं।
इस पूरे मामले में फ्लोरिडा स्थित ‘टूर प्रोड एंटर एलएलसी’ नामक कंपनी जांच के मुख्य केंद्र में है, जो विदेशों में अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ के वित्तीय कामकाज का प्रबंधन करती है। इसके मालिक थिएटर व्यवसायी जेवियर फारोनी और उनकी पत्नी एरिका जिलेट हैं। जांच के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि इस दंपति ने अमेरिका के पांच बड़े बैंकों में मौजूद अपने खातों के जरिए करोड़ों डॉलर का संदिग्ध कैश लेन-देन किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस कंपनी ने महासंघ की ओर से लगभग २६० मिलियन अमेरिकी डॉलर (२६ करोड़ डॉलर) की आय का प्रबंधन किया, लेकिन बैंक रिकॉर्ड से पता चलता है कि इस भारी-भरकम राशि का केवल एक छोटा हिस्सा ही फुटबॉल के वास्तविक खर्चों में इस्तेमाल हुआ। शेष राशि में से लगभग ५७ मिलियन डॉलर बिना किसी स्पष्ट आर्थिक कारण या व्यावसायिक सेवा के अलग-अलग मुखौटा कंपनियों और लाभार्थियों को ट्रांसफर कर दिए गए। इनमें से कुछ कंपनियां तो बारिलोचे और ब्यूनस आयर्स के उन गरीब लोगों के नाम पर पंजीकृत पाई गईं जो सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं पर निर्भर हैं।
एएफए के ५८ वर्षीय अध्यक्ष क्लाउडियो टैपिया का विवादों से पुराना नाता रहा है और वह वर्ल्ड कप से पहले भी भ्रष्टाचार के कई आरोपों का सामना कर रहे थे। घरेलू लीग में किए गए अलोकप्रिय बदलावों और विश्व कप की तैयारी के नाम पर कमजोर टीमों के साथ खेले गए दोयम दर्जे के मैत्रीपूर्ण मैचों को लेकर उनके नेतृत्व की पहले ही कड़ी आलोचना हो रही थी। इसके अलावा, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के साथ भी देश के फुटबॉल क्लबों के स्वामित्व मॉडल को लेकर उनका पुराना और तीखा विवाद चल रहा है। इसी साल मार्च के अंत में मिलेई सरकार द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद टैपिया पर टैक्स चोरी का मुकदमा भी शुरू हुआ था। अब वर्ल्ड कप के ठीक बीच में अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की इस कार्रवाई ने अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ की साख को दांव पर लगा दिया है।










