क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बिगड़ने का बढ़ा खतरा
नयी दिल्ली: अमेरिकी नीतियों में तुर्की के पक्ष में दिखाई दे रहे कथित झुकाव को लेकर इसराइली मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अंकारा में आयोजित नेटो समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के बीच बढ़ती करीबियों के बाद इसराइल की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा तुर्की को फिर से एफ-३५ जैसे अत्याधुनिक और विनाशकारी हथियार मुहैया कराने के प्रति सकारात्मक रुख अपनाना इसराइल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसराइली विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुर्की को ये आधुनिक फाइटर जेट और हथियार मिल जाते हैं, तो इससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सैन्य और शक्ति का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाएगा, जो इसराइल की सुरक्षा के लिए सीधा नुकसानदेह साबित होगा।
इसराइल के घरेलू मीडिया कवरेज और रणनीतिक विश्लेषणों से यह बात साफ तौर पर उभर कर सामने आई है कि इसराइल अब राष्ट्रपति अर्दोआन के नेतृत्व वाले तुर्की को एक सामान्य देश के बजाय एक बड़े रणनीतिक ‘खतरे’ के रूप में देख रहा है। हालांकि अमेरिका पारंपरिक रूप से इसराइल का सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी रहा है, लेकिन ट्रंप की तुर्की से बढ़ती नजदीकी ने इसराइल को असहज कर दिया है। यह स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है जब इसराइल पहले से ही ईरान के साथ बड़े क्षेत्रीय संघर्षों से जूझ रहा है। इसराइली रक्षा रणनीतिकारों का मानना है कि तुर्की की बढ़ती सैन्य ताकत और वाशिंगटन के साथ उसके सुधरते रिश्ते भविष्य में इसराइल की क्षेत्रीय सैन्य संप्रभुता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।










