मालिक जिस दिन पीएफ जमा करेंगे, अनशन खुद समाप्त हो जाएगा
खरसांग: खरसांग के लॉन्गव्यू चाय बागान में जारी श्रमिकों के अनशन को ९० दिन पूरे हो चुके हैं। हिल प्लांटेशन एम्प्लॉयज यूनियन ने जानकारी दी है कि अनशन की शुरुआत से लेकर अब तक १ करोड़ २८ लाख रुपये की हाजिरी और वेतन का बकाया जमा कराया जा चुका है, जिसे आंदोलन की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। यूनियन के अनुसार पीएफ की मद में भी अब तक ३ लाख ७ हजार रुपये जमा कराए गए हैं। सिलीगुड़ी पीएफ कार्यालय ने यूनियन के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि बाकी बचे बकाया पीएफ को जमा कराने की प्रक्रिया पीएफ कार्यालय द्वारा तेजी से चलाई जा रही है।
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन लगातार जारी रहेगा। आज ७२ घंटे के भूख हड़ताल का १३वां चरण समाप्त हो गया है, जिसके साथ ही ३ सदस्यों की टीम ने १४वें चरण का ७२ घंटे का अनशन शुरू कर दिया है। यूनियन का कहना है कि जिस दिन बागान मालिक गोविंद गर्ग पीएफ की पूरी राशि ईपीएफओ कार्यालय में जमा करा देंगे, उसी दिन अनशन अपने आप समाप्त हो जाएगा। लॉन्गव्यू चाय बागान के श्रमिक १२ करोड़ रुपये पीएफ, ८४ लाख रुपये ग्रेच्युटी, २० लाख रुपये एलटीए और बकाया मजदूरी की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
श्रमिकों का यह भूख हड़ताल पिछले ८७ दिनों से भी अधिक समय से जारी है। बागान मालिक गोविंद गर्ग तथा श्रम एवं पीएफ विभाग की ओर से पीएफ भुगतान को लेकर कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण यह ७२ घंटे का चरणबद्ध अनशन १३ जून से शुरू किया गया था। इस दौरान लॉन्गव्यू स्थित साईं मंदिर परिसर में ७२ घंटे के भूख हड़ताल का १३वां चरण पूरा हुआ।
१२वें चरण का ७२ घंटे का अनशन समाप्त करने वाले सदस्यों में लबिन विश्वकर्मा, मोहन विश्वकर्मा और सुमेंद्र तामांग शामिल हैं। इसके बाद १३वें चरण के ७२ घंटे के अनशन में जानुकी भुषाल, कल्पना रसाइली और बसंत लखांद्री आदि ने सहभागिता निभाई है। अनशन पर बैठे श्रमिकों का स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और आवश्यक इलाज एवं देखभाल प्रदान की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित पक्षों से उनकी जायज मांगों का तुरंत समाधान करने का आग्रह किया है।
उल्लेखनीय है कि २ जुलाई २०२६ को हुई त्रिपक्षीय बैठक में बागान मालिक गोविंद गर्ग ने पीएफ का पैसा दो किस्तों में देने का वादा किया था, लेकिन पीएफ कार्यालय द्वारा इस संबंध में कोई गारंटी न दिए जाने के कारण बैठक बेनतीजा रही थी। इसके बाद श्रमिकों ने निर्णय लिया कि पीएफ की राशि ईपीएफओ कार्यालय में जमा होने पर ही अनशन समाप्त किया जाएगा। मालिक द्वारा पीएफ जमा न किए जाने के कारण ईपीएफओ कार्यालय ने बागान को सील कर दिया है और पीएफ कार्यालय ने श्रमिकों को आश्वस्त किया है कि कानून के मुताबिक मालिक को पीएफ का भुगतान करना ही होगा।










