रात में अचानक खुल जाती है नींद… दोबारा सोने के लिए अपनाएं ये तरीके

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​कई लोगों को रात में अच्छी नींद आती है लेकिन अचानक देर रात दो से तीन बजे के बीच उनकी नींद टूट जाती है। वे फिर से सोने की काफी कोशिश करते हैं लेकिन फिर भी नींद आंखों से बहुत दूर रहती है। कई लोग इसे तनाव की वजह मानते हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या समझते हैं। इस तरह जागना कई अलग-अलग समस्याओं का संकेत हो सकता है। गहरी नींद, पर्याप्त नींद और तनाव मुक्त रहना न सिर्फ हमारे जीवन के लिए बहुत अहम है बल्कि हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। हमारी नींद एक जैसी अवस्था में नहीं होती है, यह अलग-अलग चरण से गुजरती है जैसे हल्की नींद, गहरी नींद, सतर्कता और रैपिड आई मूवमेंट नींद। यह चक्र हर ९० मिनट में बदलता है। रात के पहले आधे हिस्से में गहरी नींद अधिक आती है, जबकि भोर होते-होते नींद हल्की यानी सतर्कतापूर्ण हो जाती है। इसलिए दो से तीन बजे के बीच शरीर हल्की नींद की अवस्था में होता है और हम छोटी-छोटी बातों से भी जाग सकते हैं।
​रात के दो से तीन बजे के बीच जागने के कई कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कारण शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम है। इस समय शरीर धीरे-धीरे अगले दिन के लिए तैयारी शुरू कर देता है और कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ने लगता है जो हमें जगाने में मदद करता है। सामान्य परिस्थितियों में यह वृद्धि इतनी धीमी होती है कि हमें इसका पता भी नहीं चलता, लेकिन अगर लगातार तनाव, चिंता या नींद में खलल बना रहता है, तो कोर्टिसोल का स्तर पहले से ही अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में यह प्राकृतिक वृद्धि अचानक चेतावनी संकेत के रूप में काम करती है और नींद में खलल डालती है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर आप आमतौर पर रात १० या ११ बजे सोते हैं, तो सुबह ३ बजे का समय आपके शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस समय तक आप अपनी गहरी नींद का अधिकांश हिस्सा पूरा कर चुके होते हैं। इस अवस्था में आपकी नींद बहुत हल्की होती है, इसलिए थोड़ी सी भी हलचल या हल्की सी आवाज भी आपको आसानी से जगा सकती है। स्वस्थ वयस्क वास्तव में हर रात २ से ४ बार जागते हैं पर वे क्षण कुछ ही सेकेंड के होते हैं, इसलिए सुबह याद नहीं रहता।
​चिकित्सकों के अनुसार नींद दरअसल कई हार्मोनों की संयुक्त क्रिया पर निर्भर करती है जिसमें मेलाटोनिन का स्तर कम होने से नींद की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। वहीं एड्रिनालिन और नॉरएड्रिनालिन हार्मोन चिंता या तीव्र भावनात्मक स्थितियों में अचानक नींद टूटने का कारण बन सकते हैं। रात में ध्यान भटकाने वाली चीजें कम होती हैं, इसलिए अचानक जागने के बाद मस्तिष्क का ध्यान अधूरे कामों, वित्तीय समस्याओं, नौकरी के तनाव या व्यक्तिगत चिंताओं पर अधिक केंद्रित होता है। विशेषज्ञों ने बेहतर नींद के लिए चार महत्वपूर्ण उपाय बताए हैं। सबसे पहले सोने से कम से कम एक-दो घंटे पहले अपना फोन, टैबलेट और कंप्यूटर बंद कर दें तथा हल्की रोशनी में कोई किताब पढ़ें या सुकून देने वाला संगीत सुनें। दूसरा, सोने से ठीक पहले शराब पीने से बचें और रात को देर से भारी या मीठे खाद्य पदार्थ खाने से भी परहेज करें। तीसरा, अगर आपकी नींद टूट जाए, तो अपना फोन या घड़ी न देखें क्योंकि समय देखने से आप तुरंत हिसाब लगाने लगते हैं कि कितनी नींद बची है और इससे तनाव बढ़ जाता है। चौथा, यदि आप करीब २० मिनट से लेटे हुए हैं और नींद नहीं आ रही है, तो बिस्तर से उठकर दूसरे कमरे में चले जाएं तथा हल्की रोशनी में बैठकर कुछ शांत व उबाऊ काम करें। जब तक आंखें बहुत भारी न हो जाएं, तब तक बिस्तर पर वापस न जाएं ताकि दिमाग को यह सीख मिले कि बिस्तर आराम से सोने की जगह है, चिंता करने की नहीं।

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