नई दिल्ली: सिक्किम का भारत में विलय एक लंबी राजनीतिक, सामाजिक और सामरिक प्रक्रिया का परिणाम था, जिसमें जनता की आकांक्षाओं और लोकतंत्र की जीत ने निर्णायक भूमिका निभाई।सिक्किम पर वर्ष १६४२ से नामग्याल राजवंश का शासन रहा। ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष १८६१ में इसे एक संरक्षित राज्य का दर्जा दिया गया। वर्ष १९४७ में भारत की स्वतंत्रता के समय सिक्किम की जनता और कई नेता भारत में विलय चाहते थे, किन्तु तत्कालीन परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका।वर्ष १९५० में सिक्किम के महाराजा ताशी नामग्याल और भारत सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण संधि हुई। इस समझौते के अनुसार सिक्किम को आंतरिक स्वायत्तता दी गई, जबकि रक्षा, विदेश नीति और संचार की जिम्मेदारी भारत को सौंपी गई। चोग्याल के रूप में राजा का शासन जारी रहा, लेकिन जनता में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी।वर्ष १९६२ के भारत-चीन युद्ध के बाद सिक्किम का सामरिक महत्व काफी बढ़ गया। चीन ने इस क्षेत्र पर दावा जताना शुरू किया और वर्ष १९६७ में चोला क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें भारतीय सेना ने अपनी मजबूती प्रदर्शित की। इससे स्पष्ट हो गया कि सिक्किम की सुरक्षा के लिए भारत का सहयोग आवश्यक है।वर्ष १९६३ में ताशी नामग्याल के निधन के बाद पाल्देन थोंडुप नामग्याल अंतिम चोग्याल बने। वे सिक्किम को स्वतंत्र राष्ट्र बनाए रखना चाहते थे, जबकि जनता राजशाही और सामंती व्यवस्था से असंतुष्ट थी। वर्ष १९७० के दशक तक लोकतंत्र की मांग व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी थी।४ अप्रैल १९७५ को चोग्याल के जन्मदिन के अवसर पर राज्य में व्यापक विरोध और हिंसा की घटनाएं हुईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय सेना ने हस्तक्षेप किया और राजमहल को अपने नियंत्रण में लिया। इसके बाद सिक्किम की विधानसभा ने राजशाही समाप्त कर भारत में विलय का प्रस्ताव पारित किया।१४ अप्रैल १९७५ को सिक्किम में ऐतिहासिक जनमत संग्रह कराया गया, जिसमें लगभग ९७.५ प्रतिशत जनता ने भारत में विलय के पक्ष में मतदान किया। इस भारी जनसमर्थन ने विलय का मार्ग प्रशस्त किया।जनमत संग्रह के बाद भारतीय संसद ने संविधान संशोधन के माध्यम से सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया। १६ मई १९७५ को सिक्किम आधिकारिक रूप से भारत का बाईसवां राज्य बना। ल्हाण्डुप दोर्जी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने और इस प्रकार लगभग तीन सौ तैंतीस वर्षों पुरानी राजशाही का अंत होकर लोकतंत्र की स्थापना हुई।









