नई दिल्ली: भारत और भूटान के बीच न्यायिक एवं शैक्षिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से भूटान के दो युवा लॉ प्रोफेशनल्स को भारतीय सुप्रीम कोर्ट में ‘लॉ क्लर्क’ के रूप में नियुक्त किया गया है। भूटान की शीर्ष अदालत के साथ हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत इन दोनों होनहार युवाओं ने सोमवार से सुप्रीम कोर्ट में अपना कामकाज संभाल लिया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने दोनों युवा प्रोफेशनलों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच न्यायिक सहकार्य को प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सीजेआई के अनुसार, ये दोनों लॉ क्लर्क आगामी तीन महीने तक सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग कोर्ट में अपनी सेवाएं देंगे। इस अवधि के दौरान उन्हें भारतीय लॉ क्लर्कों के समान ही मानदेय दिया जाएगा और उनके यात्रा का पूरा खर्च भी भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही वहन किया जाएगा।
दोनों देशों की शीर्ष अदालतों के बीच युवाओं के इस आदान-प्रदान कार्यक्रम की घोषणा पिछले साल अक्टूबर में तत्कालीन सीजेआई बी. आर. गवई ने भूटान के ‘जिग्मे सिंगे वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ’ की यात्रा के दौरान की थी। उसी घोषणा के तहत अब हर साल भूटान के दो लॉ ग्रेजुएट्स को भारतीय सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं देने का अवसर मिल रहा है। भारत लगातार न्यायिक और तकनीकी क्षेत्र में भूटान का सहयोग कर रहा है, जिसके तहत इसी साल ५ मार्च को सीजेआई सूर्यकांत ने भूटान का दौरा कर वहां के राजा से भी मुलाकात की थी। अपनी उस यात्रा के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने भूटान की न्यायिक प्रक्रिया के डिजिटलीकरण (डिजिटल माध्यम) में भारत की ओर से हर संभव सहायता प्रदान करने का पूरा भरोसा दिया था।










