काेलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार को स्वीकार करने से मना करते हुए पद से इस्तीफा देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी का आरोप है कि उन्हें चुनाव आयोग के साथ मिलकर जबरन हराया गया है और यह जीत ‘नैतिक’ नहीं बल्कि ‘चोरी’ की है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि जब वे हारी ही नहीं हैं, तो लोकभवन जाकर इस्तीफा देने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। उनके अनुसार, यह चुनावी लड़ाई उनके खिलाफ रची गई एक साजिश थी।
ममता बनर्जी के इस अड़ियल रुख पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का हस्तांतरण और हार-जीत की प्रक्रिया संविधान के अनुसार चलती है। शुभेंदु ने जोर देकर कहा कि संविधान में सब कुछ स्पष्ट रूप से लिखा है और किसी की व्यक्तिगत इच्छा संवैधानिक नियमों से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने ममता बनर्जी को नसीहत दी कि उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि अब सारा मामला संवैधानिक मर्यादाओं के इर्द-गिर्द सिमट गया है।
इसी बीच, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए तर्क दिया कि पिछले तीन महीनों से राज्य का प्रशासन मुख्य सचिव संभाल रहे थे, इसलिए तकनीकी तौर पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की और धांधली के जरिए नतीजों को प्रभावित किया गया। फिलहाल बंगाल में चुनाव बाद की यह खींचतान राजनीतिक के साथ-साथ एक बड़े संवैधानिक संकट की ओर बढ़ती नजर आ रही है।









