काेलकाता: पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की जो स्थिति रही, उसने सबको चौंका दिया है। आमतौर पर चुनावी हिंसा के लिए चर्चा में रहने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में इस बार शांति का माहौल दिखा। इसका श्रेय ओडिशा कैडर के २००९ बैच के आईपीएस अधिकारी चरण सिंह मीणा को दिया जा रहा है, जिनकी प्रशासनिक कुशलता की अब जमकर प्रशंसा हो रही है।संवेदनशील चुनाव और बड़ी चुनौती:भवानीपुर सीट इस बार पूरे देश की नजरों में थी। यहाँ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा और बेहद कड़ा मुकाबला था। राजनीतिक तनाव और दोनों पक्षों की भारी सक्रियता के कारण इस क्षेत्र में हिंसा की प्रबल आशंका जताई जा रही थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराना निर्वाचन आयोग और प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा थी।स्पेशल ऑब्जर्वर के रूप में प्रभावी भूमिका:वर्तमान में ओडिशा में डीआइजी प्रोविजनिंग (मुख्यालय) के पद पर तैनात चरण सिंह मीणा को इस चुनाव के लिए विशेष रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने स्पेशल ऑब्जर्वर के रूप में सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में ऐसी चौकसी बरती कि मतदान के दौरान किसी भी बड़ी अप्रिय घटना या विवाद की खबर सामने नहीं आई।विरोधी खेमे ने भी बांधे तारीफ के पुल:इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह रही कि जहां अक्सर विपक्षी दल प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाते हैं, वहीं यहाँ स्थिति उलट दिखी। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने खुद आईपीएस चरण सिंह मीणा के कामकाज की सार्वजनिक रूप से सराहना की। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारी की तारीफ करते नजर आ रहे हैं।प्रशासनिक सफलता के नए मानक:राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भवानीपुर जैसे ‘हॉट सीट’ पर बिना किसी हिंसा के चुनाव संपन्न होना प्रशासनिक जीत है। २००९ बैच के अधिकारी चरण सिंह मीणा की इस सफलता ने यह साबित किया है कि अगर प्रशासनिक नेतृत्व मजबूत और निष्पक्ष हो, तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी कानून-व्यवस्था को कायम रखा जा सकता है।









