प्रतिनिधिसभा में गतिरोध: प्लेकार्ड प्रदर्शन और अध्यक्ष की चेतावनी के बाद संसद गरमाई

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काठमांडू: प्रतिनिधिसभा में प्लेकार्ड के साथ उपस्थित होकर सरकार का विरोध कर रहे श्रम संस्कृति पार्टी के सांसदों के व्यवहार को लेकर संसद के भीतर और बाहर पक्ष-विपक्ष में बहस शुरू हो गई है। सभामुख (सदन के अध्यक्ष) डोलप्रसाद अर्याल द्वारा उक्त पार्टी के सांसदों को “मर्यादा के विपरीत व्यवहार सुधारने” की चेतावनी दिए जाने के बाद सदन में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
​अध्यक्ष की चेतावनी के बावजूद गुरुवार को प्रतिनिधिसभा की बैठक में दोबारा प्लेकार्ड के साथ उपस्थित हुए श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज राई (हर्क साम्पांग) ने मांग दोहराई कि प्रधानमंत्री को संसद में आकर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देना चाहिए।
​नेपाली कांग्रेस द्वारा अध्यक्ष और सत्तापक्ष का अतीत याद दिलाना
​गुरुवार की बैठक में प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के सचेतक निष्कल राई ने अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सत्ताधारी दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अतीत के आंदोलन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कल तक जब रास्वपा विपक्ष में थी, तब उसके सांसदों ने नीला स्कार्फ पहनकर वेल घेरा था, फर्श पर पालथी मारकर किताबें पढ़ी थीं और नीले रंग का प्लेकार्ड लहराया था; ऐसे में अब श्रम संस्कृति पार्टी का प्लेकार्ड अमर्यादित कैसे हो गया?
​सचेतक राई ने सदन को मर्यादित और जवाबदेह बनाने के लिए प्रधानमंत्री को संसद के भीतर उपस्थित कराने हेतु अध्यक्ष से ‘रूलिंग’ (आदेश) जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार दो-तिहाई के अहंकार में संसद के प्रति अनुत्तरदायी नहीं हो सकती। विपक्ष के गतिरोध और नारेबाजी के बीच कानून मंत्री सोबिता गौतम द्वारा विधेयक पेश करने की कार्यसूची तय थी, लेकिन बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। बाद में विपक्ष की नारेबाजी के बीच ही अध्यक्ष ने दूसरी बैठक का संचालन किया।
​अध्यक्ष की सक्रियता और प्रधानमंत्री की चुप्पी
​विपक्षी दलों द्वारा संसद में उठाए जा रहे विषयों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए अध्यक्ष डोलप्रसाद अर्याल ने गुरुवार को ही प्रधानमंत्री वालिन्द्र शाह ‘बालेन’ से मुलाकात की थी। इस बातचीत के बारे में अध्यक्ष ने कार्यव्यवस्था परामर्श समिति की बैठक में जानकारी देते हुए कहा कि वे इस मामले में समन्वय और सहजीकरण कर रहे हैं।
​हालांकि, प्रधानमंत्री बालेन जवाब देने के लिए कब संसद में आएंगे, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद वे कभी-कभार प्रतिनिधिसभा में उपस्थित तो हुए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक एक बार भी संसद बैठक को संबोधित नहीं किया है। विशेष रूप से, राष्ट्रपति द्वारा सरकार की नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने के समय बैठक स्थल से बाहर जाने और नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा के दौरान उठाए गए सवालों का जवाब खुद न देने को लेकर प्रधानमंत्री बालेन की आलोचना होती रही है। प्रधानमंत्री के उपस्थित न होने पर गुरुवार की दूसरी बैठक में विपक्षी सांसदों ने वेल का घेराव भी किया।
​सांसदों का आचरण और अध्यक्ष के अधिकार: विशेषज्ञों की राय बंटी
​प्रतिनिधिसभा नियमावली २०७९ के तहत सदन में अभद्र व्यवहार करने वाले सांसदों को चेतावनी देने, बैठक से निष्कासित करने, तीन दिनों तक बैठक में भाग लेने से रोकने और अधिकतम १५ दिनों तक निलंबित करने का अधिकार अध्यक्ष को प्राप्त है। लेकिन नियमावली में ‘अभद्र व्यवहार’ की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।
​संसद सचिवालय के पूर्व सचिव सोमबहादुर थापा का कहना है कि संसद में प्लेकार्ड दिखाने का अभ्यास कहीं भी नहीं है और संसदीय परंपरा में इसे अच्छा नहीं माना जाता। चूंकि संसद शालीनता से सवाल पूछने की जगह है, इसलिए अनुशासन बनाए रखने के लिए अध्यक्ष को सचेत करना ही चाहिए।
​दूसरी ओर, लगभग दो दशकों तक संसद सेवा में रहे पूर्व सह-सचिव तोयानाथ भट्टराई का मानना है कि प्लेकार्ड प्रदर्शन को ध्यान आकर्षित करने और संचार का एक माध्यम माना जा सकता है। नियमावली में इसे स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है, इसलिए सार्वजनिक महत्व के विषय उठाते समय इसे अभद्र नहीं कहा जा सकता। वे सुझाव देते हैं कि ऐसे तकनीकी विषयों पर अध्यक्ष को कार्यव्यवस्था समिति की सलाह से सदन के बाहर ही बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।

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