पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, शर्तों के साथ अग्रिम जमानत मंजूर

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नई दिल्ली: ​कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी कानूनी राहत देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए जालसाजी और मानहानि के मामले में अदालत ने शुक्रवार को खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा को राहत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए खेड़ा को बड़ी राहत दी है।
​सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ अनिवार्य शर्तें भी लागू की हैं जिनका पालन खेड़ा को करना होगा। अदालत के आदेशानुसार उन्हें पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा और जब भी जांच अधिकारी उन्हें बुलाएंगे, उन्हें थाने में पेश होना होगा। इसके अलावा वे अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे और उन्हें सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करने तथा गवाहों को प्रभावित न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
​यह पूरा विवाद अप्रैल २०२६ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से उपजा था जिसमें पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और दुबई में उनकी बेनामी संपत्ति है। सरमा परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दस्तावेजों को ‘एआई-जनरेटेड’ और फर्जी बताया था। सुनवाई के दौरान खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया, जबकि सरकारी पक्ष ने हिरासत में पूछताछ की मांग की थी। अंततः अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हुए खेड़ा को राहत प्रदान की।

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