यांगून/लंदन: म्यांमार की सैन्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों से जेल में बंद लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची को जेल से हटाकर घर में नजरबंद कर दिया है। सैन्य जुंटा ने दावा किया है कि सू ची की ३३ साल की सजा को घटाकर अब १८ साल कर दिया गया है। साल २०२१ में सैन्य तख्तापलट के जरिए निर्वाचित सरकार को हटाने के बाद से ८० वर्षीय सू ची राजधानी नैपीडॉ की एक जेल में बंद थीं।
सरकारी मीडिया ने एक तस्वीर प्रसारित की है जिसमें सू ची दो वर्दीधारी सैन्य अधिकारियों के सामने बैठी नजर आ रही हैं। हालांकि, लंदन में रह रहे उनके बेटे किम एरिस ने इस घोषणा और तस्वीर पर गहरा संदेह जताया है। बीबीसी से बातचीत में एरिस ने कहा कि यह तस्वीर कम से कम चार साल पुरानी है और इसका वर्तमान स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें अपनी मां की सुरक्षा का स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिल जाता, तब तक वे सैन्य सरकार की किसी भी बात पर भरोसा नहीं करेंगे।
१९९१ में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित सू ची ने अपने जीवन का लंबा हिस्सा सैन्य शासन के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष में बिताया है। इससे पहले भी वह लगभग १५ वर्षों तक नजरबंद रही थीं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय सू ची पर लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित बताता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के भीतर विद्रोही समूहों के बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने के कारण सैन्य शासक मिन आंग हलिंग अब इस तरह के कूटनीतिक हथकंडे अपना रहे हैं।










