नेपाल: १ रुपये के नए सिक्के से हटाया गया विवादित नक्शा

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काठमांडू में उपजा विवाद, भारत के लिए कूटनीतिक राहत

नई दिल्ली: ​नेपाल की बालेन शाह सरकार द्वारा १ रुपये के नए सिक्के से विवादित राजनीतिक नक्शे को हटाने के फैसले के बाद काठमांडू के राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा हो गया है। तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में जारी इस विवादित नक्शे में भारत के तीन रणनीतिक क्षेत्रों—लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाली भूभाग के रूप में दर्शाया गया था। अब बालेन सरकार ने १ रुपये के सिक्के पर से इस विवादित नक्शे को हटाकर उसकी जगह एक प्रसिद्ध बौद्ध मठ की तस्वीर छापने का निर्णय लिया है। भारतीय विदेश मामलों के जानकार इसे दोनों देशों के बीच उपजे तनाव को कम करने और भारत की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक राहत के रूप में देख रहे हैं।
​हालांकि, सरकार के इस कदम के बाद नेपाल के अंदर वामपंथी नेताओं और विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता भीम रावल ने इस निर्णय की कड़ा शब्दों में निंदा करते हुए इसे नेपाल की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए बड़ा झटका बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रहितों से समझौता कर रही है और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी समर्थित बालेन सरकार को इस राष्ट्रविरोधी फैसले पर तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
​दूसरी ओर, नेपाल राष्ट्र बैंक ने इस पूरे मामले को विशुद्ध रूप से तकनीकी और व्यावहारिक बदलाव करार दिया है। केंद्रीय बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के अनुसार सिक्कों के डिजाइन में संशोधन का मुख्य उद्देश्य इनके आकार और वजन को कम करना है। नए निर्णय के तहत १ रुपये के सिक्के का वजन ४ ग्राम से घटाकर ३.२ ग्राम और २ रुपये के सिक्के का वजन ५ ग्राम से घटाकर ३.८ ग्राम किया जा रहा है। साथ ही इन सिक्कों को पीले रंग के बजाय स्टील फिनिश में तैयार किया जाएगा। हालांकि बैंक ने यह भी साफ किया है कि २ रुपये के सिक्के पर नेपाल का नया राजनीतिक नक्शा यथावत बना रहेगा।
​उल्लेखनीय है कि भारत और नेपाल के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को लेकर सीमा विवाद वर्षों पुराना है। दोनों देशों के बीच सीमा का निर्धारण १८१६ की ऐतिहासिक सुगौली संधि के तहत हुआ था, जिसमें काली नदी को प्राकृतिक सीमा रेखा माना गया था। नेपाल का दावा है कि काली नदी का उद्गम लिंपियाधुरा से होता है, इसलिए कालापानी से लिपुलेख तक का संपूर्ण क्षेत्र उसका है। इसके विपरीत भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि काली नदी का उद्गम कालापानी के पास से होता है और यह क्षेत्र ऐतिहासिक तथा प्रशासनिक रूप से भारत के उत्तराखंड राज्य का अभिन्न हिस्सा है। चीन सीमा के पास स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है और लिपुलेख दर्रे से होकर ही प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग गुजरता है।

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