नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक ‘यू-टर्न’ लिया है। ईरान के पावर प्लांट और पुलों को नष्ट करने की खुली धमकी देने के महज कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा कर दी है। इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ईरान पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन अब उन्होंने अचानक बमबारी के खतरे को टालते हुए बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दी है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने यह कदम पाकिस्तान सरकार के विशेष अनुरोध पर उठाया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा के बाद इस निर्णय को कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। बुधवार को समाप्त होने वाले पिछले युद्धविराम को अब बिना किसी समय सीमा के आगे बढ़ा दिया गया है, जिससे फिलहाल के लिए मध्य पूर्व में मंडरा रहे युद्ध के बादल छंटते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान को एक ‘संयुक्त प्रस्ताव’ तैयार करने के लिए और अधिक समय देना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस फैसले के पीछे अमेरिका में बढ़ता युद्ध विरोधी प्रदर्शन और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का डर मुख्य कारण है। युद्ध शुरू होने की स्थिति में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव ने व्हाइट हाउस को कदम पीछे खींचने पर मजबूर किया है। ट्रंप द्वारा युद्धविराम की कोई ‘डेडलाइन’ तय न करना उनकी उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह भविष्य में अपनी शर्तों के अनुसार बातचीत को मोड़ना चाहते हैं।
हालांकि, बमबारी रुकने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद अभी भी अनसुलझा है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक समुद्री व्यापार के लिए यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगा। वहीं इजरायल और लेबनान के बीच भी युद्धविराम लागू है, जिसे पूरे क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस अतिरिक्त समय का उपयोग किस तरह के समझौते के लिए करता है।










