जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को तकनीक-सक्षम और सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला में हुआ गहन मंथन

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नई दिल्ली: जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को संस्थागत रूप से मजबूत और अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से आयोजित ‘स्ट्रेंथनिंग ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट्स’ संबंधी राष्ट्रीय कार्यशाला के पहले दिन महत्वपूर्ण सत्र संपन्न हुए। कार्यशाला के पहले दिन समूह-३ और समूह-४ के ‘ब्रेकआउट सत्रों’ में जनजातीय विकास के लिए तकनीकी नवाचारों और संस्थागत सुधारों पर विस्तृत चर्चा की गई।
​समूह-३ के सत्र का संचालन जनजातीय कार्य मंत्रालय के उपसचिव श्री गणेश नागराजन ने किया। इस सत्र में सी-डैक, वाधवानी एआई, आईआईटी दिल्ली, सर्वम एआई और आईआईटी भुवनेश्वर के विशेषज्ञ शामिल हुए। सत्र में जनजातीय क्षेत्रों के अनुसंधान, योजना, सेवा वितरण और नागरिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जीआईएस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नवाचार प्रणालियों के उपयोग पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया।
​वहीं, समूह-४ के सत्र का संचालन जनजातीय कार्य मंत्रालय के उपसचिव श्री जाफर मलिक ने किया। इस सत्र में योजना आयोग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार, बीसीकेआईसी, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी और बीएआईएफ के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। यह सत्र मुख्य रूप से शासन सुधार, मानव संसाधन विकास, संस्थागत नेटवर्क और रणनीतिक साझेदारी पर केंद्रित रहा।
​दोनों सत्रों ने सामूहिक रूप से जनजातीय विकास के लिए अनुसंधान, ज्ञान प्रबंधन और नवाचार को बढ़ावा देने वाले उच्च प्रदर्शन वाले, तकनीक-सक्षम और टिकाऊ टीआरआई की स्थापना की परिकल्पना को रेखांकित किया।

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