चुनाव ड्यूटी के कारण सड़कों से आधी बसें नदारद, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के पहले चरण के मतदान (२३ अप्रैल) से ठीक पहले महानगर की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर की ‘लाइफलाइन’ कही जाने वाली निजी बसों के चुनाव ड्यूटी में अधिग्रहण किए जाने के कारण यात्रियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
​१,६०० बसें चुनाव ड्यूटी में तैनात
बस यूनियनों के अनुसार, कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में संचालित होने वाली लगभग ३,००० निजी बसों में से १,६०० से अधिक बसों को प्रशासन ने अधिग्रहित कर लिया है। इन बसों का उपयोग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और मतदान कर्मियों को मतदान केंद्रों तक पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। दूसरे चरण (२९ अप्रैल) के लिए आने वाले दिनों में और अधिक बसों के अधिग्रहण की संभावना है, जिससे संकट और गहरा सकता है।
​यूनियनों की चिंता: बसों की खराब होती हालत
‘सिटी सबअर्बन बस सर्विस’ के महासचिव टीटू साहा ने बताया कि चुनाव ड्यूटी के दौरान बसों को सामान्य से तीन गुना ज्यादा दूरी (५००-६०० किमी) तय करनी पड़ रही है। इससे बसों के इंजन और मैकेनिकल स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है। यूनियनों ने सरकार से अपील की है कि कम से कम ४०% बसें सड़कों पर रहने दी जाएं ताकि जनजीवन पूरी तरह ठप न हो।
​महंगाई की मार और यात्रियों का गुस्सा
सड़कों पर बसों की कमी का फायदा उठाकर ऑटो और टैक्सी चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। चिलचिलाती गर्मी के बीच बस स्टॉप पर घंटों इंतजार करने के बाद भी लोगों को बस में जगह नहीं मिल पा रही है।

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