गोरखालैंड के लिए दार्जिलिंग में एकजुट हुए दल, संवैधानिक समाधान की ओर बढ़ा कदम

Bimal-Gurung-IANS--1785693674520_m

दार्जिलिंग: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में गोरखालैंड के स्थायी और संवैधानिक समाधान के लिए रविवार को एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। मारवाड़ी सहायक समिति भवन में हुई इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने साझा रणनीति बनाने पर सहमति व्यक्त की।
​बैठक में निर्णय लिया गया कि एक मसौदा समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) गठित कर गोरखालैंड के संवैधानिक समाधान से संबंधित साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इस मसौदे को एक महीने के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार से शीघ्र संवैधानिक समाधान के लिए प्रथम चरण की वार्ता बुलाने की मांग की जाएगी।
​गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमो) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग ने बताया कि वर्ष २०२४ में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में सभी क्षेत्रीय दलों की सहमति से साझा प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव मिला था। अन्य दलों की ओर से पहल न होने पर गोजमो ने यह बैठक बुलाई। गुरुंग ने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी वैकल्पिक व्यवस्था को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि गोरखालैंड के संवैधानिक समाधान के लिए सभी पक्षों को एक मंच पर लाना है।”
​गुरुंग ने कहा कि ११ गोरखा जातियों की लंबित मांगों और ३९६ मौजा को प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल करने पर भी चर्चा जारी है। चार दशक से जारी इस आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने सभी नेताओं से राजनीतिक मतभेद भूलकर एकजुट होने की अपील की।
​बैठक में दार्जिलिंग के विधायक नोमन राई, पूर्व विधायक डॉ. रोहित शर्मा, शोधकर्ता डॉ. पल्लवी भुजेल सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि गोरखालैंड ही इस क्षेत्र की दीर्घकालिक राजनीतिक समस्या का एकमात्र संवैधानिक और स्थायी समाधान है।

About Author

Advertisement