कोरोना की उत्पत्ति पर अमेरिका में फिर छिड़ी बहस

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खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड द्वारा दस्तवेज सार्वजनिक

नई दिल्ली: कोरोना महामारी की शुरुआत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने कुछ बेहद संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावा किया है कि कोविड-१९ की उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी खुफिया आकलन को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।
​गबार्ड ने कहा कि जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों से पता चलता है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फौसी ने चीन के वुहान स्थित लैब से जुड़े शोध की फंडिंग को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और फौसी पहले भी वुहान लैब से कोरोना वायरस के सीधे संबंध के आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं।
​राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय की ओर से जारी इन दस्तावेजों को गबार्ड ने महामारी की उत्पत्ति और अमेरिकी संस्थानों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम बताया।
​तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, “कोविड-१९ महामारी ने अमेरिका समेत दुनियाभर के करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। ऐसे में अब पूरी दुनिया की जनता इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही की मांग कर रही है।”
​गबार्ड के अनुसार, सार्वजनिक की गई बातचीत और रिकॉर्ड यह साफ दिखाते हैं कि कोरोना वायरस के प्राकृतिक रूप से पैदा होने या वुहान लैब से लीक होने की आशंका को लेकर शुरुआती दौर में ही शीर्ष अधिकारियों और वैज्ञानिकों के बीच गहन चर्चा हुई थी। गौरतलब है कि कोरोना वायरस की सटीक उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में आज भी गहरे मतभेद हैं। जहां कुछ विशेषज्ञ प्राकृतिक संक्रमण की संभावना को मजबूत मानते हैं, वहीं एक बड़ा धड़ा अब भी लैब लीक की संभावना की आगे विस्तृत जांच की मांग कर रहा है।

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