शादी जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला होता है, इसलिए जीवनसाथी का चुनाव करते समय प्यार, करियर और सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है। गाइनेकोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. आशिता जैन के अनुसार, अपने कजिन या करीबी खून के रिश्तों में शादी करने से पैदा होने वाले बच्चों में आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारियों का खतरा सामान्य जोड़ों की तुलना में काफी बढ़ जाता है। एक ही वंश और रक्त संबंध होने के कारण पति और पत्नी दोनों में किसी एक ही सुप्त आनुवंशिक बीमारी का वाहक यानी ‘कैरियर’ होने की संभावना अत्यधिक होती है। जब दोनों पार्टनर एक ही जेनेटिक बीमारी के कैरियर होते हैं, तो प्रत्येक प्रेगनेंसी में २५ प्रतिशत संभावना होती है कि शिशु उस बीमारी से पूरी तरह ग्रसित हो, ५० प्रतिशत संभावना होती है कि बच्चा केवल उस बीमारी का कैरियर बने और केवल २५ प्रतिशत संभावना ही बच्चा पूरी तरह सामान्य और रोगमुक्त पैदा होने की रहती है।
हालांकि, खून के रिश्तों में शादी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हर बच्चा अनिवार्य रूप से किसी आनुवंशिक बीमारी के साथ ही जन्म लेगा, लेकिन सामान्य कपल्स के मुकाबले ऐसे मामलों में जेनेटिक विकारों का जोखिम कई गुना अधिक रहता है। यदि किसी की शादी कजिन से हो चुकी है, तो घबराने या चिंता करने के बजाय सही समय पर वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे जोड़ों को फैमिली प्लानिंग करने से पहले जेनेटिक काउंसलिंग करानी चाहिए और कैरियर स्क्रीनिंग टेस्ट से गुजरना चाहिए। इसके साथ ही, डॉक्टरों को अपने परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और आनुवंशिक बीमारियों की पूरी जानकारी ईमानदारी से देनी चाहिए।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और तकनीक की मदद से आज इस तरह के जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि जांच में पति-पत्नी दोनों एक ही आनुवंशिक बीमारी के कैरियर पाए भी जाते हैं, तो आईवीएफ के साथ पीजीटी यानी ‘प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग’ (
पीजीटी) जैसे आधुनिक विकल्पों का सहारा लिया जा सकता है। इस तकनीक के माध्यम से महिला के गर्भाशय में भ्रूण प्रत्यारोपित करने से पहले ही प्रयोगशाला में भ्रूण की जांच कर ली जाती है और केवल जेनेटिक बीमारी से मुक्त स्वस्थ भ्रूण को ही गर्भ में रोपित किया जाता है। इससे आनुवंशिक बीमारी से प्रभावित बच्चे के जन्म के खतरे को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। अतः सही जानकारी, जागरूकता और आधुनिक तकनीकों की मदद से समझदारी भरा फैसला लेकर एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।









