गुवाहाटी: असम में बाढ़ की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। राज्य में बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर १३ पहुंच गई है, जबकि ११ जिलों के ३.१३ लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए हैं।
पड़ोसी पहाड़ी राज्यों, विशेषकर नागालैंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण आई अचानक बाढ़ से राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट शामिल हैं। अकेले शिवसागर जिले में ही लगभग १.५८ लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। राज्यभर में ७९४ गांव जलमग्न हो चुके हैं, जबकि १९०९९ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब गई है। इसके अलावा लगभग ५.९७ लाख पशुधन भी प्रभावित हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है।
प्राधिकरण के अनुसार, ब्रह्मपुत्र नदी निमातीघाट में, बूढ़ीदिहिंग नदी खोवांग में, दिखोव नदी शिवसागर में, दिसांग नदी नांगलामूराघाट में तथा धनसिरी नदी गोलाघाट और नुमालीगढ़ क्षेत्रों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण निचले इलाकों में जलभराव और कटान की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।
बाढ़ का असर सड़क और रेल यातायात पर भी व्यापक रूप से पड़ा है। नाजिरा-गेलेकी मार्ग का एक बड़ा हिस्सा बह जाने से शिवसागर और नाजिरा के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। वहीं, टीओक के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-७१५ के जलमग्न होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। रेलवे पटरियों और सिमलुगुड़ी रेलवे स्टेशन के यार्ड में पानी भर जाने के कारण पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने ३० से अधिक ट्रेनों को रद्द, परिवर्तित या आंशिक रूप से समाप्त कर दिया है।
प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाई गई है। भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और अग्निशमन सेवाएं प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई हैं। राज्य सरकार ने अब तक ५२ राहत शिविर और वितरण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां १२,७२० से अधिक विस्थापित लोगों को आश्रय, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।









