देहरादून/हैदराबाद:
भारतीय सैन्य इतिहास में शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से कड़ा सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली पहली महिला कैडेट्स ने भारतीय सेना और वायुसेना में अधिकारी बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) और हैदराबाद की एयर फोर्स अकादमी में आयोजित भव्य ‘पासिंग आउट परेड’ के साथ ही १४ महिला कैडेट्स ने अपने सैन्य करियर की औपचारिक शुरुआत की। यह ऐतिहासिक क्षण इसलिए भी विशेष है क्योंकि वर्ष २०२१ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को एनडीए में प्रवेश देने के फैसले के बाद ही यह रास्ता खुला था। अगस्त २०२२ में प्रवेश लेने वाले इस पहले बैच ने तीन साल की कठिन सैन्य व शैक्षणिक ट्रेनिंग और एक वर्ष के अतिरिक्त विशेष प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर यह मुकाम हासिल किया है।
आईएमए के इतिहास में पहली बार बेटियों ने पार किया ‘अंतिम पग’
आईएमए के ९४ वर्षों के गौरवशाली इतिहास में यह पहली बार हुआ जब महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेट्स के साथ कदम से कदम मिलाते हुए ‘अंतिम पग’ (दीक्षांत रेखा) पार किया और भारतीय थलसेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। देहरादून में आयोजित समारोह में एनडीए के पहले महिला बैच की ९ कैडेट्स भारतीय थलसेना में कमिशन्ड हुईं, जबकि हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी से ५ महिला कैडेट्स भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनीं।
दोनों सैन्य संस्थानों में आयोजित इस पासिंग आउट परेड में कुल ७४६ कैडेट्स को कमीशन मिला। इनमें आईएमए से ५१५ कैडेट्स (जिसमें १६ मित्र देशों के ३४ विदेशी कैडेट भी शामिल हैं) पास आउट हुए, जबकि एयर फोर्स अकादमी से २३१ फ्लाइट कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर देश सेवा की नई जिम्मेदारी संभाली।
’यह देश के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
आईएमए की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे भारतीय सैन्य इतिहास का एक अत्यंत गौरवपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा, “पहली बार नौ महिला कैडेट्स का सैन्य अधिकारी के रूप में पास आउट होना देश में लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण का जीवंत प्रतीक है। नेतृत्व केवल आदेश देने का नाम नहीं, बल्कि चरित्र, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचायक होता है।”
विशाल कुमार को ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’, बांग्लादेश के अल्वी सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट
परेड के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया। ऑफिसर कैडेट विशाल कुमार को प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। वहीं, बांग्लादेश के ऑफिसर कैडेट जैफ सदी अल्वी को सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट के सम्मान से नवाजा गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीए के माध्यम से नियमित सैन्य अधिकारी के रूप में महिलाओं की यह एंट्री भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक युगांतरकारी बदलाव है। यह कदम न केवल सेना में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश की आने वाली पीढ़ियों की करोड़ों बेटियों को सीमाओं की रक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े होने की प्रेरणा देगा।











