मेक्सिको सिटी: सह-मेक्सिको ने अपना शानदार फॉर्म जारी रखते हुए फीफा वर्ल्ड कप २०२६ के अंतिम १६ में प्रवेश कर लिया है। बुधवार सुबह खेले गए राउंड ऑफ ३२ के मुकाबले में मेक्सिको ने इक्वाडोर को २-० से शिकस्त दी। मेक्सिको सिटी स्टेडियम में खेले गए इस मैच के पहले हाफ में किए गए दो गोलों ने घरेलू टीम को जीत दिलाई। जूलियन क्विनोनेस ने २२वें मिनट में टीम को बढ़त दिलाई, जबकि राउल जिमिनेज ने ३१वें मिनट में एक और गोल करके टीम की जीत सुनिश्चित कर दी। इस जीत के साथ ही मेक्सिको ने वर्ल्ड कप के नॉकआउट राउंड में पिछले ४० सालों से जारी जीत के सूखे को भी खत्म कर दिया। टीम ने १९८६ के बाद पहली बार नॉकआउट राउंड में जीत हासिल की है। उस समय मेक्सिको ने नॉकआउट राउंड में बुल्गारिया को २-० से हराया था। संयोग से वह मैच भी मेक्सिको सिटी स्टेडियम में ही खेला गया था और टीम के वर्तमान कोच जेवियर एगिरे उस समय टीम के मिडफील्डर थे। इसके बाद १९९४, २००२, २००६, २०१०, २०१४, २०१८ और २०२२ के वर्ल्ड कप में हर बार मेक्सिको नॉकआउट राउंड से बाहर हो गया था। इस बार टीम ने घरेलू मैदान पर अपने इस लंबे इंतजार को खत्म किया। प्री-क्वार्टर फाइनल में मेक्सिको का सामना इंग्लैंड और डीआर कांगो के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा।
खराब मौसम के कारण मेक्सिको और इक्वाडोर के बीच यह मैच एक घंटे की देरी से शुरू हुआ। घरेलू दर्शकों के भारी समर्थन के बीच मेक्सिको ने शुरुआत से ही आक्रामक फुटबॉल खेला। लगातार बनाए गए दबाव का फायदा २२वें मिनट में मिला, जब जूलियन क्विनोनेस ने गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। इसके ठीक ९ मिनट बाद राउल जिमिनेज ने टीम के लिए दूसरा गोल करके इक्वाडोर की मुश्किलें बढ़ा दीं। यह जिमिनेज का फीफा वर्ल्ड कप २०२६ में दूसरा और मेक्सिको के लिए कुल ४७वां गोल है। उनसे आगे केवल जेवियर ‘चिचारितो’ हर्नांडेज़ हैं, जिन्होंने मेक्सिको के लिए सबसे अधिक ५२ गोल किए हैं। दूसरे हाफ के खेल में इक्वाडोर ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और वापसी करने का प्रयास किया, लेकिन मेक्सिको के मजबूत रक्षापंक्ति के आगे उनकी एक न चली। इस तरह सह-मेजबान टीम ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार चौथे मैच में क्लीन शीट रखते हुए अंतिम १६ में प्रवेश किया। मैच के आखिरी पलों यानी इंजरी टाइम के पांचवें मिनट में विपक्षी खिलाड़ी से बहस करने के कारण इक्वाडोर के डिफेंडर पिएरो हिकापिए को रेड कार्ड दिखाया गया। इक्वाडोर ने पहली बार २००६ में फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट राउंड में जगह बनाई थी, और उस समय टीम को अंतिम १६ में जर्मनी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। उसके २० साल बाद इक्वाडोर ने फिर से नॉकआउट राउंड में प्रवेश तो किया, लेकिन टीम को एक बार फिर खाली हाथ ही लौटना पड़ा।










