असम: ‘जब तक चांद-सूरज हैं, असमिया भाषा जीवित रहेगी’: मुख्यमंत्री सरमा

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गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने असमिया भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शनिवार को दिसपुर लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक आकाश में चांद और सूरज रहेंगे, असमिया भाषा जीवित रहेगी।
​मुख्यमंत्री सरमा ने असम से प्रेम करने वाले सभी नागरिकों से आगामी जनगणना में अपनी भाषा के रूप में ‘असमिया’ दर्ज कराने का आग्रह किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि घर में असमिया भाषा का उपयोग नहीं किया जाता है, तो केवल जनगणना में असमिया लिखने का कोई लाभ नहीं होगा।
​मुख्यमंत्री ने कहा, “चार-चापोरी परिषद को यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि जनगणना में कौन सी भाषा लिखी जाए। लोगों को अपनी वास्तविक पहचान के आधार पर भाषा का चयन करना चाहिए।”
​इसके साथ ही मुख्यमंत्री सरमा ने जोर देकर कहा कि राज्य की मुख्य समस्याएं ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी असमिया समाज को कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी असमिया भाषा, जनसांख्यिकीय मुद्दों और राज्य की अस्मिता से जुड़े विषयों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए की।

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