ईटानगर: बढ़ते जनसांख्यिकीय परिवर्तन और आदिवासी समुदायों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताओं के बीच, अरुणाचल प्रदेश सरकार ने इनर लाइन परमिट (आइएलपि ) प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक अलग समर्पित विभाग स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में छात्र संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, नागरिक समाज और समुदाय-आधारित संगठनों की भागीदारी के साथ लगभग सात घंटे चली उच्चस्तरीय परामर्श बैठक के बाद बुधवार को यह निर्णय घोषित किया गया।
मुख्यमंत्री खांडू ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा, “आदिवासी अधिकार, आइएलपि और एपीएसटी से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सभी हितधारकों की भागीदारी से एक गहन और सार्थक संवाद संभव हुआ है।”
सरकार ने सैद्धांतिक रूप से आइएलपि प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक अलग विभाग बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। इसे आदिवासी अधिकारों और जनसांख्यिकीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसी क्रम में, २९ मई को उच्चस्तरीय निगरानी बैठक के लिए अरुणाचल आदिवासी जनजाति मंच, एएपिएसयु , एसटी बचाओ आंदोलन समिति तथा कानूनी विशेषज्ञों के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया गया है, जो आगे की कार्ययोजना तैयार करेगा।
आइएलपि प्रणाली १८७३ के बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन के तहत स्थापित एक व्यवस्था है, जो गैर-आदिवासियों के प्रवेश को नियंत्रित करती है। आदिवासी समुदाय इसे अपनी संस्कृति, भूमि और पहचान की सुरक्षा का प्रमुख आधार मानते हैं।
वर्तमान में प्रस्तावित “अरुणाचल प्रदेश इनर लाइन परमिट निर्देशिका, २०२६” के विरोध में कई समूह प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए प्रावधान मौजूदा सुरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं।
इसी संदर्भ में हाल ही में ३६ घंटे के बंद के बाद कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह आदिवासी अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नए आइएलपि विभाग से नीति कार्यान्वयन अधिक व्यवस्थित, सख्त और प्रभावी होने की उम्मीद है।









