काठमांडू: नेपाल में ‘हिमालयन वियाग्रा’ के नाम से मशहूर यार्सागुम्बा लंबे समय से पहाड़ी लोगों की कमाई का मुख्य साधन रहा है। आमतौर पर यार्सागुम्बा या हिमालयन वियाग्रा की कीमत ३० लाख रुपये प्रति किलो तक रहती है। लेकिन हाल के समय में इसे कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। इस कारण दुर्गम पहाड़ों से यार्सागुम्बा लाने वाले किसान इसे कौड़ियों के भाव बेचने पर मजबूर हैं। इससे नेपाल के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और वे अन्य काम-धंधे की तलाश में भारत पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
यार्सागुम्बा संग्रहकर्ता पलायन करने को मजबूर
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जिन लोगों ने औषधीय कवक यार्सागुम्बा को पाने के लिए आवश्यक सामान और उपकरणों पर ६०,००० रुपये खर्च किए, उन्हें बहुत मुश्किल से १,२०,००० रुपये की कमाई हुई। जान जोखिम में डालकर यार्सागुम्बा इकट्ठा करने के बावजूद उन्हें इसकी सही कीमत नहीं मिल पा रही है। इसका मुख्य कारण मांग में कमी और मिलने वाले यार्सागुम्बा की खराब गुणवत्ता है। जलवायु परिवर्तन के कारण यार्सागुम्बा मिलना दुर्लभ हो गया है। जो मिलते भी हैं, वे अल्प विकसित रहते हैं, जिससे बाजार में उनकी सही कीमत नहीं मिल पा रही है।
यार्सागुम्बा को क्यों नहीं मिल रहे खरीदार?
एक नेपाली यार्सागुम्बा विक्रेता ने बताया कि उनके उत्पाद का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। नेपाल में मिलने वाला ९० फीसदी यार्सागुम्बा चीन निर्यात किया जाता है। लेकिन अब चीनी व्यापारियों ने आना बंद कर दिया है, क्योंकि वे अब खुद ही इसे इकट्ठा कर रहे हैं। इस कारण स्थानीय व्यापारी भी संग्रहकर्ताओं से यार्सागुम्बा की खरीद नहीं कर रहे हैं। डोल्पा में उत्पादित यार्सागुम्बा पिछले साल २० लाख से २४ लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बिका था। इस साल इसकी कीमत ३० लाख रुपये प्रति किलोग्राम रहने का अनुमान है।
यार्सागुम्बा से नेपाल को होती है बड़ी कमाई
पिछले साल मुगु में उत्पादित यार्सागुम्बा १८ लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बिका था। इस साल अब तक संभागीय वन कार्यालय ने केवल १० किलोग्राम यार्सागुम्बा के पारगमन परमिट जारी किए हैं। पिछले साल इसने २२ किलोग्राम के परमिट जारी किए थे, जबकि रारा राष्ट्रीय उद्यान ने ३३ किलोग्राम के परमिट जारी किए थे।
यार्सागुम्बा मुगु के मुगुम करमारोंग ग्रामीण नगरपालिका के कोइकी, थुलो कोइकी, रिमार, टांके और अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इस वर्ष लगभग ४,२०० संग्रहकर्ताओं ने इन चारागाहों से कवक एकत्र किया, जिससे ग्रामीण नगरपालिका को २८ लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।





