कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पर्यटन क्षेत्र के विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने दो वैश्विक स्तर के पर्यटन स्थलों के विकास के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. राज्य के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष ने कोलकाता के मिलन मेला प्रांगण में आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) २०२६ के उद्घाटन सत्र के दौरान इस बात की आधिकारिक जानकारी दी। मंत्री घोष के अनुसार, हाल ही में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य ने केंद्र की ‘एक राज्य, एक वैश्विक पर्यटन स्थल’ योजना के तहत एक के बजाय दो पर्यटन स्थलों के विकास का प्रस्ताव रखा था, जिसे केंद्र ने सहर्ष मंजूरी दे दी है।सिलीगुड़ी से विधायक एवं राज्य पर्यटन मंत्री घोष ने स्पष्ट किया कि दार्जिलिंग को राज्य का पहला विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाया जाएगा, जबकि दूसरे वैश्विक पर्यटन स्थल की पहचान राज्य की दीर्घकालिक पर्यटन रणनीति के तहत की जाएगी। सरकार के इस कदम से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने और पश्चिम बंगाल की समृद्ध पर्यटन क्षमता को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करने में बड़ी मदद मिलेगी.राज्य सरकार होटल उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करने के लिए एक नई पर्यटन औद्योगिक नीति भी तैयार कर रही है। इस नई नीति के तहत होटल और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र में आने वाले निवेशकों को नकद तथा गैर-नकद दोनों प्रकार के विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे, ताकि बड़े निवेशक राज्य में अपनी होटल और आतिथ्य परियोजनाएं स्थापित कर सकें। चूंकि आतिथ्य क्षेत्र रोजगार सृजन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए सरकार इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है. इसके साथ ही, सरकार होमस्टे (गृह प्रवास) और ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ व्यवस्था के लिए भी एक अलग और व्यावहारिक नीति तैयार कर रही है, जिसके लिए राज्य के सभी गृह प्रवास संगठनों से जरूरी सुझाव मांगे गए हैं। इस नई नीति में स्पष्ट दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की जाएगी, जिससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय संचालकों को भी संचालन में आसानी होगी। राज्य की यह संपूर्ण पर्यटन विकास रणनीति मुख्य रूप से पांच प्रमुख आधारों पर केंद्रित होगी, जिनमें क्षमता से प्रदर्शन, सभी के लिए पर्यटन, बंगाल की नई पर्यटन पहचान, पूर्व का प्रवेश द्वार तथा साझेदारी के माध्यम से प्रगति शामिल हैं।पर्यटन मंत्री घोष ने आगे बताया कि दार्जिलिंग को एक बेहतरीन विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए २,५०० करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में, मिरिक के विकास के लिए केंद्र सरकार ने १०० करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है, जिससे वहां के झील क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, पर्यटक आवास का विस्तार और नई मनोरंजक पर्यटन गतिविधियां विकसित की जाएंगी. इसके अलावा, सरकार की योजना कालिम्पोंग को प्रकृति एवं साहसिक पर्यटन केंद्र, दीघा को प्रमुख समुद्री पर्यटन गंतव्य तथा सुंदरबन को पर्यावरण अनुकूल (इको-फ्रेंडली) और कार्बन तटस्थ पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने की है। मंत्री ने कहा कि इन सभी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को केंद्र सरकार के सक्रिय सहयोग से राष्ट्रीय पर्यटन विकास ढांचे के तहत धरातल पर लागू किया जा रहा है। कोलकाता में आयोजित यह तीन दिवसीय यात्रा एवं पर्यटन मेला (टीटीएफ) रविवार को संपन्न हो गया, जिसमें हर साल की तरह विभिन्न राज्यों और बड़ी संख्या में पर्यटन व यात्रा सेवा प्रदाताओं ने अपनी उत्साहजनक भागीदारी दर्ज की।








