मेघालय: ​प्रशासनिक सुधार और सुशासन को जन-केंद्रित होना अनिवार्य: मुख्यमंत्री​

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शिलांग: राज्यका के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने कहा है कि किसी भी सार्थक प्रशासनिक सुधार की शुरुआत बदलाव को अपनाने की इच्छाशक्ति से ही संभव होती है। मेघालय की राजधानी शिलांग में आयोजित “नेक्स्टजेन प्रशासनिक और ई-गवर्नेंस सुधार” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर उन्होंने यह विचार साझा किए। सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे भारतीय केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि बड़े पैमाने पर किए जाने वाले सुधारों का अपना महत्व है, लेकिन हमारी दैनिक व्यवस्था, प्रक्रियाओं और मानसिकता में किए जाने वाले छोटे-छोटे सुधार ही समाज में सबसे बड़ा और गहरा प्रभाव पैदा करते हैं।
​मुख्यमंत्री संगमा के अनुसार, मेघालय सरकार शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तकनीक के उपयोग और जनभागीदारी को विशेष प्राथमिकता दे रही है। राज्य में शुरू की गई ‘सीएम कनेक्ट’, कैबिनेट रिट्रीट और नागरिक फीडबैक तंत्र जैसी नवीन पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने शासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब शासन व्यवस्था जन-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और विभिन्न विभागों के आपसी तालमेल पर आधारित होती है, तभी वह वास्तव में अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बन पाती है।
​सुशासन की वास्तविक परिभाषा को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि गवर्नेंस का असली पैमाना यह नहीं है कि सरकार ने कितनी योजनाएं लागू की हैं, बल्कि यह है कि उन योजनाओं से आम लोगों के जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने आह्वान किया कि लोक सेवकों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, काम में आने वाली बाधाओं और लेटलतीफी को दूर करने तथा नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनने के लिए निरंतर काम करना चाहिए। इसके साथ ही, जनता की सेवा में सहानुभूति, स्पष्ट उद्देश्य और निरंतर सुधार की प्रतिबद्धता के साथ सभी को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

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