गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक हालिया साक्षात्कार ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में बड़ी दरार पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि वह हमेशा भगवान से प्रार्थना करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के आपसी संबंध बहुत बेहतर न हों। उनके तर्क के अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच संबंध बहुत मधुर होते हैं, तो अवैध घुसपैठियों को वापस भेजने में कठिनाई होती है क्योंकि तब कूटनीतिक कारणों से सरकारें कड़े कदम उठाने से कतराती हैं।
इस विषय पर विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि भारतीय सुरक्षा बल रात के अंधेरे का फायदा उठाकर उन स्थानों से घुसपैठियों को ‘धक्का देकर’ (पुश बैक) बांग्लादेश की सीमा में वापस भेज देते हैं जहाँ बांग्लादेशी सीमा रक्षक तैनात नहीं होते। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष ५० और इस वर्ष अब तक १,४०० लोगों को इसी तरह वापस भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री का यह बयान सार्वजनिक होते ही बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
बांग्लादेश ने इस बयान को ‘अपमानजनक’ और अंतरराष्ट्रीय मर्यादा के खिलाफ करार दिया है। साथ ही, बांग्लादेशी विशेषज्ञों और मीडिया ने मुख्यमंत्री द्वारा सीमा सुरक्षा बल के लिए १५ साल पुराने नाम ‘बीडीआर’ का उपयोग करने और दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के बारे में गलत जानकारी देने पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सरमा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि असम में संदिग्ध नागरिकों की पहचान और उनके निष्कासन की प्रक्रिया को और अधिक तेज किया जाएगा।










