नई दिल्ली: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए लखनऊ के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘नैनो-ड्रेसिंग’ विकसित की है जो गंभीर घावों और जिद्दी संक्रमण के उपचार के तरीके को बदल देगी। सीएसआईआर-एनबीआरआई के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई यह हर्बल पट्टी न केवल घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करती है बल्कि उन खतरनाक ‘सुपरबग्स’ का भी सफाया कर देती है जिन पर एंटी-बायोटिक्स दवाएं बेअसर साबित होती हैं। इस पट्टी के निर्माण में अजवाइन के तेल और बायोडिग्रेडेबल नैनो फाइबर्स का उपयोग किया गया है जो एमआरएसए और ई-कोलाई जैसे घातक कीटाणुओं को महज १२ से २४ घंटे के भीतर खत्म करने की क्षमता रखते हैं।
इस अत्याधुनिक पट्टी की बनावट मानव शरीर की कोशिकाओं जैसी है जिसके कारण घाव भरने की प्राकृतिक प्रक्रिया काफी सक्रिय हो जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पट्टी हाइड्रोफिलिक गुणों से युक्त है जिससे यह घाव की नमी को सोखकर उसे पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान करती है और घाव पर चिपकती नहीं है। इससे मरीजों को पट्टी बदलते समय होने वाले असहनीय दर्द से राहत मिलेगी और संक्रमण फैलाने वाली बैक्टीरिया की चिपचिपी परत यानी बायोफिल्म को यह ९५ प्रतिशत तक रोकने में सक्षम है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में स्थान पाने वाला यह शोध चिकित्सा विज्ञान में घाव भरने की सबसे आदर्श स्थिति पैदा करता है और जलन तथा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को ९० प्रतिशत तक कम करने का दावा करता है।









