२४ अप्रैल का इतिहास: खेल, विज्ञान, राजनीति और मानवीय घटनाओं का अनोखा संगम

psd-3d-calendar-date-24-april-2024-3d-rendering_603649-978

नई दिल्ली: विश्व इतिहास में २४ अप्रैल की तारीख एक ऐसी विशेष तिथि के रूप में दर्ज है, जहाँ खेल के गौरव, विज्ञान की उपलब्धियाँ, राजनीति के उतार-चढ़ाव और मानवीय त्रासदियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह दिन क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि वर्ष १९७३ में आज ही के दिन मुंबई में महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का जन्म हुआ था। ‘क्रिकेट के भगवान’ और ‘मास्टर ब्लास्टर’ के रूप में विख्यात सचिन ने अपने २४ वर्ष लंबे करियर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में १०० शतक लगाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। वे भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित होने वाले पहले और सबसे कम आयु के खिलाड़ी भी हैं।
इतिहास के पन्नों में यह दिन कई महत्वपूर्ण युद्धों और संधियों का साक्षी रहा है। वर्ष १८७७ में रूस ने ओटोमन साम्राज्य के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की थी, जबकि १८९८ में स्पेन ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया। वर्ष १९२० में पोलैंड की सेना ने यूक्रेन पर आक्रमण किया और १९२६ में बर्लिन संधि पर हस्ताक्षर हुए, जिसने यूरोपीय राजनीति की दिशा को प्रभावित किया। इसी क्रम में वर्ष १९१६ में आयरलैंड में ब्रिटिश शासन के खिलाफ ‘ईस्टर विद्रोह’ की शुरुआत हुई। वहीं वर्ष १९८० में अमेरिका द्वारा ईरान में बंधक बनाए गए नागरिकों को मुक्त कराने के लिए चलाया गया ‘गरुड़ पंजा अभियान’ असफल रहा।
विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी २४ अप्रैल का विशेष महत्व रहा है। वर्ष १८०० में अमेरिका में विश्व की सबसे बड़ी पुस्तकालय ‘कांग्रेस पुस्तकालय’ की स्थापना हुई। वर्ष १९९० में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन’ ने ‘हबल अंतरिक्ष दूरबीन’ को अंतरिक्ष में स्थापित कर ब्रह्मांड के अध्ययन के नए द्वार खोले। वर्ष १९६२ में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान ने पहली बार उपग्रह के माध्यम से दूरदर्शन संकेत भेजने में सफलता प्राप्त की, जबकि १९७० में चीन ने अपना पहला उपग्रह ‘डांग फांग हांग’ प्रक्षेपित किया। हालांकि वर्ष १९६७ का यह दिन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए दुखद रहा, जब सोवियत अंतरिक्ष यात्री व्लादिमीर कोमारोव अंतरिक्ष अभियान के दौरान दुर्घटना में मारे गए।
मानवीय दृष्टिकोण से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष २०१३ में बांग्लादेश की राजधानी ढाका के निकट सावर में ‘राणा प्लाजा’ नामक इमारत ढहने से एक हजार से अधिक श्रमिकों की मृत्यु हो गई, जिसे औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है। वहीं वर्ष २०२३ में संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बनने का स्थान प्राप्त किया। नेपाल के इतिहास में भी वर्ष २००६ का यह दिन उल्लेखनीय रहा, जब राजा ज्ञानेंद्र ने जनआंदोलन के दबाव में संसद बहाल करने की घोषणा की।
आध्यात्मिक, साहित्यिक और कला जगत में भी इस दिन की विशेष पहचान है। वर्ष २०११ में आध्यात्मिक गुरु सत्य साई बाबा का निधन हुआ, जबकि १९७४ में प्रसिद्ध हिंदी कवि रामधारी सिंह दिनकर ने दुनिया को अलविदा कहा। इसी दिन चित्रकार जामिनी रॉय और संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर का भी निधन हुआ था। दूसरी ओर, संगणक क्षेत्र में ‘कट, कॉपी और चिपकाओ’ आदेश विकसित करने वाले वैज्ञानिक लैरी टेस्लर, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत तथा कन्नड़ अभिनेता राजकुमार का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाता है।
इस प्रकार २४ अप्रैल का दिन खेल, विज्ञान, इतिहास और मानवीय भावनाओं के विविध आयामों को समेटे हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि के रूप में स्थापित है।

About Author

Advertisement