नई दिल्ली: अर्जेंटीना को फाइनल में हराकर स्पेन के विश्व विजेता बनने के साथ ही फीफा विश्व कप समाप्त हो गया है। इसके बाद भारतीय खेल प्रेमियों की नज़रें अब ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल २०२६ पर टिकी हैं, जिसकी शुरुआत स्कॉटलैंड में २३ जुलाई से होने जा रही है। इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल २०२२ के २० खेलों की तुलना में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में केवल १० खेलों को ही शामिल किया गया है। यह पिछले ३२ सालों में किसी भी राष्ट्रमंडल खेल में शामिल स्पर्धाओं की सबसे कम संख्या है। आखिरी बार १९९४ में कनाडा के विक्टोरिया में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में १० स्पर्धाएं आयोजित की गई थीं। ग्लासगो २०२६ में खेलों की संख्या में कटौती से भारत को बड़ा नुकसान होगा, क्योंकि पदक तालिका में भारत को शीर्ष पंक्तियों में बनाए रखने में मदद करने वाले कुश्ती, शूटिंग, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे खेल इस बार देखने को नहीं मिलेंगे। इन खेलों में भारत ने बर्मिंघम २०२२ में जीते गए कुल ६१ पदकों में से ३० पदक जीते थे। इसी कारण राष्ट्रमंडल खेलों के पिछले संस्करण में चौथे स्थान पर रहने वाले भारत के लिए इस बार चुनौती कठिन रहने वाली है। हालांकि, साल २०३० में अहमदाबाद में होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों में ये खेल वापस लौटेंगे। इस बीच, खेल शुरू होने से पहले ही भारतीय मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) टीम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बेलफास्ट से ग्लासगो पहुंची २२ सदस्यीय भारतीय मुक्केबाजी टीम के आधे खिलाड़ियों का सामान खो गया है। जैस्मीन, साक्षी और परवीन सहित कई खिलाड़ियों के ट्रेनिंग गियर और उद्घाटन समारोह के कपड़े ग्लासगो नहीं पहुंचे हैं। जुलाई की शुरुआत में मुक्केबाजों के दोहा से बेलफास्ट जाते समय भी ऐसी ही घटना हुई थी।
भारत ने ४ साल पहले राष्ट्रमंडल खेलों में १६ खेलों के लिए २१० खिलाड़ियों का दल भेजा था। इस बार खेलों की संख्या कम होने के कारण १२५ सदस्यीय दल ग्लासगो गया है। इसमें १०१ एथलीट मुख्य खेलों में हिस्सा लेंगे, जबकि २४ एथलीट पैरा राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेंगे। इस १२५ सदस्यीय दल में ७७ पुरुष और ४८ महिला एथलीट शामिल हैं। इसमें सबसे बड़ा दल एथलेटिक्स का है, जिसमें पैरा एथलीटों को मिलाकर १० महिलाओं और २२ पुरुषों सहित कुल ३२ एथलीट शामिल हैं। इसके बाद मुक्केबाजी में १४, जूडो में १४ और भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) में १२ खिलाड़ियों को स्थान मिला है। राष्ट्रमंडल खेल २०२६ की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को मिली थी, लेकिन अधिक खर्च का तर्क देते हुए विक्टोरिया ने २०२३ में अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद ग्लासगो को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। स्कॉटलैंड ने समय की कमी के कारण बड़े प्रायोजक खोजने में असमर्थता व्यक्त की थी। इसी वजह से कम खर्च में आयोजन करने के लिए क्रिकेट और हॉकी जैसे टीम खेलों को हटा दिया गया था। ग्लासगो खेलों में एथलेटिक्स, स्विमिंग, ट्रैक साइकिलिंग, वेटलिफ्टिंग, ३x३ बास्केटबॉल, नेटबॉल, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक, जूडो और बॉक्सिंग जैसे खेल शामिल हैं, जबकि बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, स्क्वैश, टेबल टेनिस, ट्रायथलॉन, कुश्ती, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवेन्स जैसे खेलों को बाहर कर दिया गया है। राष्ट्रमंडल खेल २०२६ का समापन २ अगस्त को होगा।










