१५ अप्रैल का इतिहास: धर्म, राजनीति और विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ाव

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नई दिल्ली: १५ अप्रैल का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण विशेष स्थान रखता है। यह दिन धार्मिक जागरण, राजनीतिक बदलाव और वैज्ञानिक उपलब्धियों का साक्षी रहा है।
गुरु नानक का जन्म
साल १४६९ में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक का जन्म ननकाना साहिब (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था।
उन्होंने समानता, मानवता और एक ईश्वर के सिद्धांत पर आधारित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अपने जीवनकाल में व्यापक यात्राएँ कर समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। उनके उपदेशों ने सिख धर्म की नींव रखी।
फ्रांस का धार्मिक प्रतीकों पर कानून
फ्रांस में २००४ में एक महत्वपूर्ण कानून को मंजूरी दी गई, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई।
इसमें हिजाब, सिख पगड़ी और ईसाई क्रॉस शामिल हैं। यह कदम फ्रांस की धर्मनिरपेक्ष नीति को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया था, हालांकि इस पर वैश्विक स्तर पर बहस भी हुई।
ऐतिहासिक और राजनीतिक घटनाएँ
१६५८ में धरमत का युद्ध हुआ, जिसमें औरंगजेब ने जसवंत सिंह को हराया।
१६८९ में फ्रांस ने स्पेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
भारत से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम
१९४८ में हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ।
१९७६ में भारत ने बीजिंग में अपना राजदूत भेजने की घोषणा की।
१९८९ में छह बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
वैश्विक राजनीति
१९९० में मिखाइल गोर्बाच्योव सोवियत संघ के पहले और अंतिम राष्ट्रपति बने। उनके सुधारों ने विश्व राजनीति की दिशा बदल दी।
१९९४ में भारत ने १२४ देशों के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए।
विज्ञान और तकनीक
२०१० में भारत ने क्रायोजेनिक रॉकेट तकनीक के साथ जीएसएलवी–डी३ लॉन्च किया, जो अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

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