नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए व्यापारिक जहाजों को निकालने के लिए शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को फिलहाल रोकने का बड़ा फैसला लिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसके चलते आपसी सहमति से इस अभियान को कुछ समय के लिए टाला जा रहा है। विशेष रूप से, ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने यह निर्णय पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस संदर्भ में जानकारी दी कि ईरान के खिलाफ संचालित अमेरिका-इजरायल संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। हालांकि प्रशासन ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से अलग एक स्वतंत्र व्यापारिक सुरक्षा अभियान बताया था, लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया ने इसे अपनी रणनीतिक जीत करार दिया है। तेहरान का दावा है कि वैश्विक शिपिंग के लिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने में विफल रहने के बाद ट्रंप प्रशासन को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने आरोप लगाया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट किया है। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। दूसरी ओर, ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने होर्मुज क्षेत्र में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हमले की सूचना दी है, जिससे युद्धविराम की स्थिति पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि युद्धविराम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन वे हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे इस संकट के स्थाई समाधान के लिए जापान और चीन जैसे वैश्विक भागीदारों के साथ संपर्क में हैं। विशेष रूप से, अगले सप्ताह उनकी चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली वार्ता को इस दिशा में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य संघर्ष से बचने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि युद्ध की स्थिति में वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के अस्थिर होने का गंभीर खतरा बना हुआ है।









